40 गर्भवती महिलाओं कि स्वास्थ्य सुरक्षा दांव पर! यवतमाल में दुर्गम कोलाम बस्तियों में रास्ते बंद होने का खतरा

Yavatmal Monsoon: मारेगांव तहसील की दुर्गम कोलाम बस्तियों में बारिश के कारण रास्ते बंद हो रहे है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने 40 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव सेवा देने की बड़ी चुनौती है।
Maregaon Tribal Area Health Issues
गड्ढो से भरी मारेगांव की सड़क (सोर्स- फोटो नवभारत)
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Maregaon Tribal Area Health Issues: विकास के दावों के बीच यवतमाल जिले के मारेगांव तहसील की दुर्गम आदिवासी कोलाम बस्तियों में हर वर्ष बरसात जीवन के लिए गंभीर चुनौती बनकर आती है। इस वर्ष भी बारिश के दौरान कई गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क टूटने की आशंका है। ऐसे में इन बस्तियों में रह रही 40 गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव, मातृ-शिशु स्वास्थ्य तथा समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है।

गांवों तक नहीं पहुंचती स्वास्थ्य सेवाएं

बरसात शुरू होते ही तहसील के कई दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों के रास्ते, पुल और नाले जलमग्न हो जाते हैं। इससे कोलाम बस्तियों का संपर्क मुख्य सड़कों से कट जाता है। परिणामस्वरूप एम्बुलेंस, चिकित्सकीय दल, दवाइयां और अन्य स्वास्थ्य सेवाएं समय पर गांवों तक नहीं पहुंच पातीं। ऐसे हालात में गर्भवती महिलाओं के लिए जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मारेगांव तहसील में वर्तमान में 164 गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण है, जिनमें 24 कोलाम बस्तियों की 40 महिलाएं शामिल हैं। इन महिलाओं की सुरक्षित प्रसूति सुनिश्चित करना प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है।

यवतमाल जिला स्वास्थ्य अधिकारी सुभाष ढोले ने कहा है कि आने वाले दिनों में ऐसी स्थिति में एम्बुलेंस तथा डॉक्टरों को सतर्क रखा जाएगा। बारिश के पानी से संपर्क टूटने वाले ग्रामों पर विशेष नजर रखी जाएगी। आशा स्वास्थ्य सेविका एवं समुदाय स्वास्थ्य अधिकारी को वहां तैनात रखा जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूर्व तैयारी करना बेहद जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के दौरान संपर्क टूटने से पहले स्वास्थ्य विभाग को सभी गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक दवाओं का भंडारण, प्रसव पूर्व उच्च जोखिम वाली महिलाओं का सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरण तथा आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की अग्रिम योजना तैयार करनी चाहिए। समय रहते प्रभावी तैयारी होने पर ही दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से पहुंचाई जा सकेंगी और मातृ-शिशु सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

-नवभारत लाइव के लिए उमर शरीफ कि रिपोर्ट

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