वर्धा में सड़क पर घूमता बाघ (फोटो नवभारत)
Wardha Tiger Terror: वर्धा जिले की कारंजा-घाडगे तहसील क्षेत्र में खेतों और ग्रामीण रास्तों पर दिनदहाड़े बाघ का खुला विचरण देखे जाने से किसानों, खेत मजदूरों और आम नागरिकों में दहशत का माहौल है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए सामाजिक कार्यकर्ता रोशन वरठी ने वनविभाग और प्रशासन से इस दिशा में तत्काल कार्रवाई की मांग की है। यदि शीघ्र ही बाघ को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर नहीं ले जाया गया, तो तहसील कार्यालय के समक्ष आंदोलन किया जाएगा, ऐसी चेतावनी ग्रामीणों ने दी है।
तहसील के खैरी, धोटीवाड़ा, बोरगांव, काजली, राहटी, नागझरी, चिखली, जोगा, नादोरा, और बांगडापूर जैसे गांवों में बीते कुछ दिनों से दिन के उजाले में भी बाघ देखे जा रहे हैं। ये इलाके जंगलों से सटे हुए हैं, और वर्तमान में खरीफ फसलों जैसे कपास, सोयाबीन, तुअर आदि की खेती जोरों पर है। हर ओर हरियाली के चलते वन्यप्राणियों को खेतों और गांवों की ओर आकर्षित होने के संकेत मिल रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बाघ कभी खेतों के बीच तो कभी सड़कों के किनारे पेड़ों पर बैठा हुआ शिकार की प्रतीक्षा करता दिख रहा है। आये दिन बाघ दिखने से किसानों और खेत मजदूरों के लिए खेतों में जाकर नियमित कार्य करना अत्यंत खतरनाक हो गया है।
किसान और खेत मजदूर सुबह-सुबह निराई, खाद डालना, कीटनाशकों का छिड़काव और अन्य कृषि कार्य करने खेतों में जाते हैं। लेकिन बाघ की मौजूदगी के चलते यह कार्य जान हथेली पर रखकर करना पड़ रहा है। लोगों में इतनी दहशत है कि बच्चे स्कूल जाने से कतरा रहे हैं और महिलाएं घर से बाहर निकलने में डर रही हैं।
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सामाजिक कार्यकर्ता रोशन वरठी ने वन विभाग के अधिकारियों और जिला प्रशासन से अपील की है कि बाघ को तुरंत पकड़कर किसी सुरक्षित वनक्षेत्र में स्थानांतरित किया जाए। यदि वनविभाग इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई नहीं करता, तो लोगों का आक्रोश आंदोलन का रूप ले सकता है।
वन विभाग के अधिकारी गांव-गांव जाकर स्थिति का जायजा लें और लोगों को सुरक्षा का आश्वासन दें। कारंजा-घाडगे तहसील में बाघ की बढ़ती मौजूदगी एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। ग्रामीणों की जान जोखिम में है और जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है। अब यह देखना होगा कि वन विभाग और प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाते हैं।