छोटा मटका बाघ को पकड़ा गया (सोर्स: सोशल मीडिया)
Tiger Rescue Operation: ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन अंतर्गत खड़संगी वन क्षेत्र के कम्पार्टमेंट संख्या 51 से गंभीर रूप से घायल बाघ टी-126 (छोटा मटका) को एक बचाव अभियान के दौरान सफलतापूर्वक पकड़ लिया गया। बाघ को आवश्यक चिकित्सा परीक्षण और आगे के उपचार के लिए ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (टीटीसी), चंद्रपुर स्थानांतरित कर दिया गया है।
12 मई 2025 को ताड़ोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन, खडसंगी के अंतर्गत निमडेला क्षेत्र के उमरीखोरा क्षेत्र में दो बाघों टी-126 (छोटा मटका) और टी-158 (बजरंग) के बीच भीषण लड़ाई हुई। इस लड़ाई में टी-158 बाघ की मौत हो गई, जबकि टी-126 गंभीर रूप से घायल हो गया।
यह अभियान ताडोबा-अंधारी बाघ अभयारण्य के त्वरित प्रतिक्रिया दल (आरआरटी) द्वारा वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, ताडोबा-अंधारी बाघ अभयारण्य प्रभु नाथ शुक्ला और उप निदेशक (बफर) आनंद रेड्डी के मार्गदर्शन में और सहायक वन संरक्षक अनिरुद्ध ढगे की देखरेख में चलाया गया। इस बचाव अभियान के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि बाघ को कम से कम चोट लगे।
एनटीसीए की मानक संचालन प्रक्रिया और उसके तहत गठित तकनीकी समिति की सिफारिशों के अनुसार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और मुख्य वन्यजीव वार्डन, महाराष्ट्र राज्य ने 27 अगस्त को एक आदेश पारित किया था कि मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण अनावश्यक मानव हताहतों को रोकने के लिए घायल बाघ टी-126 को ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (टीटीसी) चंद्रपुर में सीमित रखा जाए और उसका इलाज किया जाए।
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बता दें कि ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में अपनी बादशाहत कायम करने वाले प्रसिद्ध बाघ ‘छोटा मटका’ की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है जिससे उसके प्रशंसक गहरी चिंता में डूब गए हैं। उपचार में कथित टालमटोल के चलते प्रशंसकों ने महाराष्ट्र सरकार को ई-मेल भेजकर बाघ की सेहत पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की थी।