
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Senior Citizens Demands: देश का आम बजट (Union Budget 2026) कल, 1 फरवरी को पेश होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण वित्तीय घोषणा से पहले महाराष्ट्र के वरिष्ठ नागरिक संगठनों ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अपनी उम्मीदें साझा की हैं। महाराष्ट्र के वरिष्ठ नागरिक संगठनों की संयुक्त कार्य समिति (JAC) ने बुजुर्गों की आर्थिक संवेदनशीलता और सामाजिक अलगाव को दूर करने के लिए नीतियों में व्यापक बदलाव की मांग की है। JAC में शोधकर्ता, शिक्षाविद और गैर-सरकारी संगठन शामिल हैं।
केंद्रीय बजट से पहले वरिष्ठ नागरिक संगठनों की संयुक्त कार्य समिति की 11 सूत्रीय मांगों में सबसे प्रमुख भारतीय रेलवे में वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली रियायतों की पूर्ण बहाली है। गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के दौरान इन रियायतों को निलंबित कर दिया गया था। समिति का तर्क है कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और सामाजिक समावेश के लिए बुजुर्गों की गतिशीलता एक ‘बुनियादी जरूरत’ है, न कि कोई विलासिता।
वरिष्ठ नागरिकों के जीवन यापन और देखभाल की लागत को कम करने के लिए समिति ने GST सुधारों का प्रस्ताव दिया है। वर्तमान में बुजुर्गों की देखभाल सेवाओं (Elder Care Services) पर 18% GST लागू है, जिसे हटाने की पुरजोर मांग की गई है। पत्र में कहा गया है कि बुजुर्गों की देखभाल एक जरूरत है और इस पर टैक्स लगाना कमजोर परिवारों पर अनुचित बोझ डालता है। इसके अलावा, एडल्ट डायपर, व्हीलचेयर और वॉकिंग स्टिक जैसे आवश्यक उपकरणों पर से भी GST हटाने की मांग की गई है।
आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए JAC ने सभी गैर-आयकर दाता वरिष्ठ नागरिकों के लिए 3,000 रुपए की मासिक यूनिवर्सल पेंशन की मांग की है, जिसे समय-समय पर मुद्रास्फीति के अनुसार समायोजित किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य के मोर्चे पर, मांग की गई है कि 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को आयुष्मान भारत योजना (PMJAY) के तहत कवर किया जाए, चाहे उनकी आय का स्तर कुछ भी हो। साथ ही, इन्फ्लुएंजा, निमोनिया और दाद (Shingles) के टीकों को भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) में शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
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समिति ने कानूनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण (संशोधन) विधेयक, 2019’ को तत्काल पारित करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) और बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय नीतियां बनाने और ‘लिविंग विल’ (Living Wills) के निष्पादन को सरल बनाने की मांग भी की गई है।
समिति का कहना है कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के कुल बजट का कम से कम 10% हिस्सा वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवंटित किया जाना चाहिए। संगठनों का मानना है कि इन मांगों को पूरा करना न केवल संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक न्याय के अनुरूप होगा, बल्कि भारत को एक ‘एजिंग सोसाइटी’ (बढ़ती उम्र वाली आबादी वाले समाज) की वास्तविकताओं के लिए भी तैयार करेगा।






