वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2026-26 का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 संसद में 29 जनवरी 2026 को पेश किया।

यह रिपोर्ट देश की अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और भविष्य के विकास की संभावनाओं के बारे में पूरी जानकारी देती है, जिसमें GDP, प्रति व्यक्ति आय, विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति और देश की माली हालत की जानकारी मिलती है।

GDP विकास दर: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 7.4% रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 6.5% थी।

आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 (और 2026 की रिपोर्ट) के अनुसार, भारत में जीएसटी संग्रह में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान सकल जीएसटी संग्रह 17.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.7% से अधिक की वृद्धि दर्शाता है।

भारतीय औद्योगिक क्षेत्र ने प्रतिकूल वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद मजबूती दिखाई है। विनिर्माण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सुधार के चलते उत्पादन बढ़ा है। वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में विनिर्माण सकल मूल्य वर्धन में 7.72% से 9.13% तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

भारतीय सेवा क्षेत्र: सकल घरेलू उत्पाद में 53.6% और सकल मूल्य वर्धित में 56.4% की रिकॉर्ड हिस्सेदारी के साथ देश की वृद्धि का प्रमुख इंजन बना हुआ है। भारत विश्व का सातवां सबसे बड़ा सेवा निर्यातक है, जो ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और डिजिटल सेवाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) श्रृंखला की शुरुआत के बाद से न्यूनतम मुद्रास्फीति दर दर्ज की गई है और अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान औसत समग्र मुद्रास्फीति दर 1.7% रही।

अच्छी मानसून फसल के चलते कृषि वर्ष (AY) 2024-25 में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 3,577.3 लाख मीट्रिक टन (LMT) तक पहुंचने का अनुमान है जो पिछले वर्ष की तुलना में 254.3 लाख मीट्रिक टन अधिक है। यह वृद्धि चावल, गेहूँ, मक्का व मोटे अनाजों (श्री अन्ना) के अधिक उत्पादन के कारण हुई है।






