राज्यसभा का रण: एक सीट हमारी है, आदित्य ठाकरे के बयान से एमवीए में मची खलबली, 16 मार्च को होगा फैसला

Aditya Thackeray X Post RS Seat: महाराष्ट्र राज्यसभा चुनाव 2026: आदित्य ठाकरे ने एकमात्र जीतने योग्य सीट पर शिवसेना (UBT) का दावा ठोंका। 16 मार्च को होगा मतदान और फैसला।
Aditya Thackeray X Post RS Seat
Aditya Thackeray X Post RS Seat (फोटो क्रेडिट-X)
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Thackeray vs Congress: महाराष्ट्र की राजनीति में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सात सीटों के लिए होने वाले इस संग्राम में महा विकास अघाड़ी (MVA) के भीतर एक सीट को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट कर दिया है कि संख्या बल और पुरानी रोटेशन नीति के आधार पर यह एकमात्र जीतने योग्य सीट शिवसेना (UBT) के खाते में ही जानी चाहिए।

महायुति के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण विपक्ष के पास केवल एक सुरक्षित सीट बचती है, जिस पर अब उद्धव ठाकरे, शरद पवार और कांग्रेस—तीनों ही अपना दावा ठोक रहे हैं।

आदित्य ठाकरे का 'संख्या बल' वाला तर्क

आदित्य ठाकरे ने 'एक्स' पर पोस्ट कर गठबंधन के साथियों को याद दिलाया कि शिवसेना (UBT) के पास वर्तमान में 20 विधायक हैं, जो एमवीए के किसी भी अन्य घटक दल से अधिक हैं। उन्होंने तर्क दिया कि रोटेशन नीति के तहत भी यह मौका उनकी पार्टी का है। आदित्य ने कहा कि बातचीत सकारात्मक है, लेकिन पार्टी अपनी दावेदारी से पीछे हटने के मूड में नहीं है। शिवसेना (UBT) चाहती है कि राज्यसभा में उनके कम से कम दो प्रतिनिधि होने चाहिए, ताकि क्षेत्रीय आवाज बुलंद रहे।

संजय राउत की सक्रियता और उम्मीदवारों की रेस

शिवसेना नेता संजय राउत ने खुलासा किया कि पार्टी के भीतर से पूर्व सांसद राजन विचारे और विनायक राउत ने चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। ये दोनों नेता 2024 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना कर चुके हैं, इसलिए पार्टी उन्हें राज्यसभा के जरिए सदन में भेजने पर विचार कर रही है। हालांकि, राउत ने यह भी साफ किया कि अंतिम फैसला उद्धव ठाकरे, शरद पवार और जयंत पाटिल के बीच होने वाली सर्वसम्मति वाली बैठक में ही लिया जाएगा।

शरद पवार का कार्यकाल और विपक्ष की चुनौती

इस चुनाव की सबसे बड़ी संवेदनशीलता यह है कि अप्रैल में शरद पवार और प्रियंका चतुर्वेदी जैसे बड़े नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। शरद पवार एक और कार्यकाल के लिए उत्सुक बताए जा रहे हैं, जबकि कांग्रेस (16 विधायक) और राकांपा-शरद गुट (10 विधायक) भी अपनी दावेदारी छोड़ना नहीं चाहते। यदि एमवीए में आम सहमति नहीं बनी, तो इसका सीधा फायदा सत्तारूढ़ महायुति को मिल सकता है। 16 मार्च को मतदान के साथ ही यह साफ हो जाएगा कि विपक्ष एकजुट रह पाता है या एक सीट के लिए बिखर जाता है।

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