Thane: मनपा की लापरवाही से बिल्डर को मिली बड़ी जीत, अदालत ने रोक दी फ्लैट रजिस्ट्रेशन पर आदेश

मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के द्वारा की गई लापरवाही के चलते बिल्डर रवि डेवलपमेंट्स को फायदा हुआ है। कोर्ट में मनपा की ओर से वकील ना पेश होने से बिल्डर के पक्ष में आदेश पारित हो गया।
मीरा-भाईंदर महानगरपालिका
मीरा-भाईंदर महानगरपालिका (सौ. सोशल मीडिया )
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Thane News In Hindi: मीरा-भाईंदर महानगरपालिका की कानूनी और प्रशासनिक लापरवाही ने बिल्डर रवि डेवलपमेंट्स को बड़ा फायदा पहुंचा दिया है।

ठाणे सिविल कोर्ट ने 13 अगस्त 2025 को बिल्डर के पक्ष में आदेश पारित किया, क्योंकि मनपा की ओर से अदालत में लगातार 4 सुनवाई तारीखों पर कोई वकील पेश ही नहीं हुआ। वहीं, मुंबई हाईकोर्ट द्वारा 6 सप्ताह में निर्णय देने का स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद मनपा आयुक्त राधाविनोद शर्मा ने अब तक कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है।

कोर्ट में वकील का गायब रहना बना बिल्डर के लिए संजीवनी

22 जुलाई 2025 को बिल्डर ने मनपा के खिलाफ अदालत से अंतरिम राहत की मांग की थी, जिस पर अदालत ने मनपा को अपना पक्ष रखने और 25 जुलाई, 29 जुलाई, 5 अगस्त और 13 अगस्त को सुनवाई की तारीख तय की थी, लेकिन इन 4 तारीखों पर मनपा की वकील अनुपस्थित रही। न्यायाधीश एस।वी। दिंडीकर ने स्पष्ट कहा कि प्रतिवादी (मनपा) को बार-बार बुलाया गया, परंतु उनकी अनुपस्थिति के चलते केवल वादी (बिल्डर) द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों पर ही कार्यवाही करनी पड़ी। नतीजतन, अदालत ने मनपा के नगररचना विभाग द्वारा जारी उस पत्र पर रोक लगा दी, जिसमें सब-रजिस्ट्रार को बिल्डर के फ्लैटों का रजिस्ट्रेशन न करने का निर्देश दिया गया था।

कैसे शुरू हुआ विवाद ?

30 मार्च 2019 को मनपा ने रवि डेवलपमेंट्स को 90 इमारतों के लिए सुधारित बांधकाम अनुमति (रिवाइज्ड CC) दी थी, जिसमें कई जमीन मालिकों ने गड़बड़ी की शिकायत की थी। जांच के बाद तत्कालीन आयुक्त बालाजी खतगांवकर ने 17 जून 2019 को सभी CC रद्द कर दी।

करदाताओं का पैसा बर्बाद, बिल्डर को अप्रत्यक्ष लाभ

निचली अदालत में वकील की अनुपस्थिति, हाईकोर्ट आदेश की अवहेलना, इन दोनों ने मिलकर बिल्डर के लिए कानूनी रास्ता आसान बना दिया। मनपा की सुस्ती से जहां करदाताओं के पैसों की बर्बादी हो रही है, वहीं बिल्डर को आप्रत्यक्ष फायदा मिलता दिख रहा है। इस पूरे प्रकरण से यह उजागर होता है कि अगर मनपा का कानूनी तंत्र (विधि विभाग) और प्रशासन जिम्मेदारी से काम न करे, तो अवैध निर्माण को कानूनी ढाल मिल सकती है और न्यायिक प्रक्रिया का सीधा नुकसान जनता को झेलना पड़ता है।

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