ठाणे को मिलेगा अपना मेडिकल कॉलेज? सांसद नरेश म्हस्के ने केंद्र से की 900 बेड वाले अस्पताल के कायाकल्प की मांग

Thane Medical College: शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने ठाणे के नवनिर्मित 900 बिस्तरों वाले अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में बदलने की मांग केंद्र से की है। जिले के बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए यह बड़ा कदम है।
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शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Naresh Mhaske Proposal Thane Medical College: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी शुरू हो गई है। ठाणे से शिवसेना के लोकसभा सदस्य नरेश म्हस्के ने केंद्र सरकार से शहर में एक नया मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का औपचारिक अनुरोध किया है। यह प्रस्ताव शहर के नवनिर्मित 900 बिस्तरों वाले सरकारी अस्पताल के परिसर में ही कॉलेज शुरू करने को लेकर है।

चुनावी वादे से संसद तक का सफर

सांसद नरेश म्हस्के ने शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि उन्होंने यह प्रस्ताव संसद में रखा है। दिलचस्प बात यह है कि ठाणे नगर निगम के पिछले चुनावों के दौरान शिवसेना के चुनावी घोषणापत्र में मेडिकल कॉलेज की स्थापना एक प्रमुख मुद्दा था। अब म्हस्के इसी वादे को हकीकत में बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

PPP मॉडल पर जोर

क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए, म्हस्के ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इस सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत एक पूर्ण विकसित मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी निवेश और सरकारी निगरानी के तालमेल से यहां छात्रों को बेहतर शिक्षा और मरीजों को आधुनिक इलाज मिल सकेगा।

क्यों है मेडिकल कॉलेज की जरूरत?

ठाणे और इसके आसपास के इलाकों में जनसंख्या का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। म्हस्के के अनुसार पुराने सरकारी अस्पताल की क्षमता केवल 300 बिस्तरों की थी, जो अब की आबादी के लिए बेहद कम है। ठाणे का यह अस्पताल न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि पड़ोसी पालघर और रायगड जिलों की विशाल आबादी को भी चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करता है। ठाणे जिले का तेजी से हो रहा शहरीकरण स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के विस्तार की मांग करता है।

सांसद का मानना है कि यदि 900 बेड वाले इस आधुनिक ढांचे को मेडिकल कॉलेज में बदल दिया जाता है, तो इससे न केवल डॉक्टरों की नई फौज तैयार होगी, बल्कि ठाणे के मध्यम और गरीब वर्ग को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं भी आसानी से सुलभ हो सकेंगी।

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