आदिवासी छात्राओं का प्रेगनेंसी टेस्ट शर्मनाक; महिला आयोग ने मुरबाड स्कूल मामले में दिए जांच के आदेश

Thane: मुरबाड की सरकारी आश्रमशाला में 10वीं की छात्रा की आत्महत्या ने व्यवस्था की पोल खोल दी है। राज्य महिला आयोग की जांच में जबरन गर्भावस्था जांच और सुरक्षा में भारी चूक जैसे चौंकाने वाले खुलासे हुए।
Girl Suicide Maharashtra
ठाणे में आत्महत्या (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Murbad Ashramshala student suicide case: ठाणे जिले के मुरबाड तहसील अंतर्गत मोरोशी स्थित सरकारी आश्रमशाला (निवासी स्कूल) में 16 वर्षीय आदिवासी छात्रा की आत्महत्या का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।

25 दिसंबर को 10वीं कक्षा की छात्रा द्वारा उठाए गए इस आत्मघाती कदम के बाद स्कूल प्रशासन की गंभीर लापरवाहियां उजागर हुई हैं। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और स्पष्ट किया कि इस मामले में केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

छात्राओं का जबरन प्रेगनेंसी टेस्ट: महिला आयोग सख्त

जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि छुट्टियों के बाद स्कूल लौटने वाली छात्राओं को कथित तौर पर 'गर्भावस्था जांच' (Pregnancy Test) के लिए मजबूर किया जाता था। रूपाली चाकणकर ने इस प्रथा की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के परीक्षण लड़कियों के आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को चोट पहुँचाते हैं। आयोग ने आदिवासी विकास विभाग को निर्देश दिए हैं कि इस तरह के अपमानजनक परीक्षणों को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए।

सुरक्षा में भारी चूक और संदिग्ध गतिविधियां

महिला आयोग ने स्कूल की 'सुरक्षा चूक' पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच में पता चला कि छुट्टियों के दौरान उन व्यक्तियों को भी लड़कियों को घर ले जाने की अनुमति दी गई, जो उनके नजदीकी रिश्तेदार के रूप में सूचीबद्ध नहीं थे। चाकणकर ने बताया कि इस संस्था में पिछले कुछ दिनों में आत्महत्या का यह दूसरा मामला है, जो बेहद चिंताजनक है। सोमवार से स्कूल के पूरे कामकाज की व्यापक जांच के आदेश दिए गए हैं ताकि सिस्टम की कमियों को दूर कर इसे पारदर्शी बनाया जा सके।

अनुशासन के नाम पर उत्पीड़न करने पर एक्शन

छात्रा की आत्महत्या और स्कूल में अत्यधिक कठोर अनुशासन की शिकायतों के बाद मुख्याध्यापक प्रह्लाद भोई और अधीक्षिका जयश्री वाघधे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

गौरतलब है कि इस मामले में एक 17 वर्षीय लड़के को यौन उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है। अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर मानसिक प्रताड़ना के भी आरोप लगाए हैं।

छात्राओं की काउंसलिंग के निर्देश

आयोग ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि स्कूल की छात्राओं को तत्काल मनोवैज्ञानिक परामर्श (Counseling) उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, अभिभावकों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि छात्राओं पर किसी भी तरह के मानसिक दबाव का समय रहते पता लगाया जा सके। दौरे के समय आदिवासी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस उपअधीक्षक और बाल संरक्षण अधिकारी भी मौजूद थे।

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