
ठाणे महानगरपालिका
Maharashtra Local Body Election: ठाणे महानगरपालिका चुनाव की बिसात बिछ चुकी है और शनिवार को चुनाव चिन्हों के आवंटन के साथ ही चुनावी जंग और भी दिलचस्प हो गई है।
जहाँ एक ओर महायुति (शिवसेना-भाजपा-राकांपा) और महाविकास आघाड़ी के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही थी, वहीं अब बागियों ने इस मुकाबले को त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय बना दिया है।
शनिवार को उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह मिलते ही प्रचार की रफ्तार तेज हो गई है, लेकिन शिवसेना और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के लिए असली चुनौती विपक्षी दल नहीं, बल्कि उनके अपने ही बागी कार्यकर्ता बन गए हैं।
आंकड़ों की बात करें तो ठाणे मनपा की 9 प्रभाग समितियों के अंतर्गत आने वाली 131 सीटों के लिए कुल 1107 नामांकन दाखिल किए गए थे। जांच के दौरान 99 फॉर्म खारिज हुए और 2 जनवरी तक नाम वापसी की प्रक्रिया में 269 उम्मीदवारों ने अपने कदम पीछे खींच लिए।
अब कुल 649 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। हालांकि, प्रशासन द्वारा नाम वापस लेने के लिए बागियों को मनाने की हर संभव कोशिश की गई, लेकिन कई दिग्गजों ने पार्टी के आदेश के खिलाफ जाकर निर्दलीय मैदान में डटे रहने का फैसला किया।
शुक्रवार को शिवसेना और भाजपा के आला नेताओं ने देर रात तक बैठकों का दौर चलाया ताकि बागियों को मनाया जा सके। कुछ स्थानों पर सफलता मिली, लेकिन एक बड़ा धड़ा अभी भी नाराज है। जिन लोगों ने पार्टी के दबाव में नामांकन वापस ले लिया है, उनके भीतर भी भारी असंतोष बना हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ये बागी और नाराज कार्यकर्ता सक्रिय नहीं हुए या गुप्त रूप से विपक्ष की मदद की, तो महायुति के सुरक्षित माने जाने वाले वार्डों में भी बड़ा ‘खेला’ हो सकता है।
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प्रचार अभियान शुरू होते ही अब मतदाताओं को रिझाने के लिए वादों और दावों की झड़ी लग गई है। बागियों की मौजूदगी ने मतदाताओं के सामने विकल्पों की संख्या बढ़ा दी है। अब देखना यह होगा कि ठाणे की जनता विकास के नाम पर अधिकृत गठबंधन को चुनती है या अपने चहेते बागी नेताओं को मौका देकर सत्ता का नया समीकरण बनाती है। ठाणे मनपा की सत्ता की चाभी किसके हाथ होगी, इसका फैसला तो मतदान के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।






