मनमोहक झांकियां और गूंजते ढोल, शिव जन्मोत्सव का अभूतपूर्व उत्साह, सुहास कांदे की उपस्थिति में भव्य शोभायात्रा

Manmad Shiv Jayanti 2026: मनमाड में छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती पर विधायक सुहास कांदे की उपस्थिति में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, मुस्लिम युवाओं की भागीदारी ने सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया।
Manmad Shiv Jayanti 2026
Suhas Kande procession (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Shivaji Maharaj Jayanti: हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक और ‘जनता राजा’ छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती गुरुवार को शहर और आसपास के क्षेत्रों में पारंपरिक रीति-रिवाजों और अभूतपूर्व उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित अभिषेक पूजन, पालकी यात्रा, मावलों की सजीव झांकियां और ढोल-ताशों की गूंज ने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

विशेष रूप से ढोल-ताशों की थाप सुनकर स्थानीय विधायक सुहास कांदे भी खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने शिवभक्तों के साथ जमकर ताल मिलाई। आमतौर पर शिव जयंती की शोभायात्रा शाम को निकाली जाती थी, लेकिन विधायक सुहास कांदे के विशेष प्रयासों से इस बार सुबह शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिससे नागरिकों को उत्सव का भरपूर आनंद लेने का अवसर मिला।

मुस्लिम युवाओं की भागीदारी रही खास

उत्सव की शुरुआत बुधवार रात 12 बजे से ही हो गई थी, जब शिवभक्तों ने शिवाजी चौक पहुंचकर महाराज की प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पित कर ‘मानाचा मुजरा’ (सम्मान सूचक वंदना) किया। सार्वजनिक उत्सव समिति के अध्यक्ष नीलेश ताठे और अन्य पदाधिकारियों ने मध्यरात्रि में आरती और दुग्धाभिषेक कर महाराज को अभिवादन किया।

 सुहास कांदे की उपस्थिति में भव्य शोभायात्रा निकाली

सजीव झांकियां और सांप्रदायिक सौहार्द

विधायक सुहास कांदे और समृद्धि बैंक की अध्यक्ष अंजुमताई कांदे के मार्गदर्शन में निकली इस भव्य शोभायात्रा में छत्रपति शिवाजी महाराज के रथ के साथ मावलों की सजीव झांकियां, लेझिम पथक, वाघ्या-मुरली और सांबल जैसे पारंपरिक वाद्यों के प्रदर्शन ने नागरिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

हर मार्ग ‘शिवमय’ नजर आ रहा था

शहरवासियों के अनुसार, मनमाड के इतिहास में पहली बार इतनी भव्य और सुनियोजित मिरवणूक (शोभायात्रा) देखने को मिली। पूरे शहर को भगवा ध्वजों और आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया गया था, जिससे हर मार्ग ‘शिवमय’ नजर आ रहा था।

इस उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता सर्वधर्म समभाव रही, जहां सभी धर्मों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के युवाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी ने सामाजिक एकता की मिसाल पेश की। शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई यह यात्रा पुनः शिवाजी चौक पहुंची, जहां महाआरती के साथ इसका समापन हुआ।

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