
Illegal Construction (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mira Bhayander: राज्य मानवाधिकार आयोग के स्पष्ट निर्देशों की लंबे समय तक अनदेखी करने के बाद, मीरा-भाईंदर मनपा को मैंग्रोव बाधित क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण पर मंगलवार को कार्रवाई करनी पड़ी। खाड़ी और मैंग्रोव क्षेत्र में गैर-कानूनी निर्माण के खिलाफ अक्टूबर 2024 में आयोग द्वारा दिए गए आदेशों के बावजूद मनपा ने महीनों तक कोई कदम नहीं उठाया।
हैरानी की बात यह है कि उसी समय मनपा प्रशासन ने खुद आयोग के समक्ष रॉयल गार्डन बार, एक तबेला और दो अन्य अवैध निर्माण हटाने का एफिडेविट दाखिल किया था। आयोग ने मनपा को यह कार्रवाई तीन महीने के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन समयसीमा समाप्त होने के बाद भी ज़मीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बाद में यह मामला सरकार के संज्ञान में लाया गया। 3 फरवरी 2026 को सरकार के नगर विकास विभाग ने मनपा आयुक्त को कड़ा पत्र लिखकर पूछा कि आयोग के आदेश पर अब तक क्या कार्रवाई की गई। सरकारी पत्र के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ा और मंगलवार को मनपा ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की।
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इस घटना ने यह सवाल उठाया है कि अगर सरकार पत्र नहीं लिखती, तो क्या मनपा प्रशासन मानवाधिकार आयोग के आदेशों को अनदेखा करता रहता? यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बिना सरकारी दबाव के नियम-कानून लागू करने में मनपा कितनी गंभीरता दिखाती है।






