
(फाइल फोटो)
नासिक : देवलाली में शिवसेना शिंदे गुट की उम्मीदवार राजश्री अहिरराव के प्रचार ने महायुति में दरारें पैदा कर दी हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार) के पूर्व पदाधिकारी समीर भुजबल की नांदगाव में बगावत का शिंदे गुट ने देवलाली और दिंडोरी में आधिकारिक उम्मीदवारी देकर बदला लिया। हालांकि, दिंडोरी में नामांकन वापस ले लिया गया, लेकिन देवलाली में उम्मीदवारी तकनीकी आधार पर बरकरार रही।
अब पार्टी के उम्मीदवार महायुति के उम्मीदवार के रूप में प्रचार में जुटे हैं, जिससे असमंजस में इजाफा हुआ है और शिंदे गुट के पदाधिकारी परेशान हैं। इस स्थिति ने महायुति के भीतर मतभेदों को उजागर किया है, जिससे चुनाव में जीत की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है।
इससे देवलाली क्षेत्र में मतदाताओं की राय और समर्थन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। महायुति में सीट विभाजन पर रस्साकस्सी के बावजूद शिंदे गुट को जिले में केवल 2 सीटें मिली। अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में मित्रपक्षों के विधायक होने के कारण वे सीटें संबंधित पक्षों को जाना स्वाभाविक था। नांदगाव में छगन भुजबल के भतीजे समीर ने पक्षीय पद से इस्तीफा देकर निर्दलीय उम्मीदवारी दाखिल की है। शिंदे गुट की सीट पर हुई इस बगावत को रोकने के लिए 2 निर्वाचन क्षेत्रों में आधिकारिक उम्मीदवार उतारकर प्रत्युत्तर देने का प्रयास हुआ, लेकिन इसका उपयोग नहीं हुआ।
नांदगाव से समीर भुजबल ने नामांकन वापस नहीं लिया, बल्कि दिंडोरी और देवलाली से नामांकन वापस लेने की तैयारी शिंदे गुट को ही करनी पड़ी। इस घटनाक्रम में दिंडोरी से नामांकन वापस लिया गया लेकिन देवलाली से उम्मीदवार के पीछे नहीं हटने से शिंदे गुट की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। हाल ही में नासिक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक चुनावी रैली हुई थी, जिसमें सभी निर्वाचन क्षेत्रों के उम्मीदवारों को मंच पर आमंत्रित किया गया था। इस रैली में देवलाली से अजित पवार गुट की सरोज अहिरे को मंच पर स्थान मिला, जबकि शिंदे गुट की राजश्री अहिरराव अनुपस्थित रहीं।
यह भी पढ़ें- चिमूर में गरजे नरेंद्र मोदी, कहा- कांग्रेस खेल रही खतरनाक खेल, अब आदिवासियों को बांटकर करना चाहती है कमजोर
विधानसभा सदस्य सोमनाथ बोराडे ने दावा किया है कि सरोज अहिरे की प्रधानमंत्री की रैली में उपस्थिति इस बात की पुष्टि करती है कि वे महायुति की आधिकारिक उम्मीदवार हैं। यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में शिंदे गुट और अजित पवार गुट के बीच तनाव को दर्शाता है, जो चुनाव में अपनी-अपनी उम्मीदवारी के लिए लड़ रहे हैं। इस रैली में सरोज अहिरे की उपस्थिति और राजश्री अहिरराव की अनुपस्थिति ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। देवलाली में शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता उम्मीदवारी के मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं, जबकि अहिरराव ने महायुति के उम्मीदवार के रूप में प्रचार में तेजी लाई है। उनके साथ स्थानीय स्तर पर शिवसेना कार्यकर्ता भी प्रचार में जुटे हैं, जिससे महायुति में गड़बड़ी की स्थिति बन गई है।






