
अनिल देशमुख और परमबीर सिंह (फोटो: पीटीआई)
मुंबई. महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के बीच आरोपों का दौर चल रहा है। दोनों नेता एक-दूसरे के खिलाफ जमकर भड़ास निकाल रहे है। इस बीच पूर्व आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह ने भी इस मामले में एंट्री की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि देशमुख के असली आका शरद पवार और उद्धव ठाकरे हैं और देशमुख को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। सिंह ने कहा है कि देशमुख पर लगे 100 करोड़ की वसूली के आरोप सही हैं।
चिरंजीव देशमुख द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद परमवीर सिंह ने शुक्रवार को देशमुख पर लगाए गए आरोपों को दोहराया। सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि सुशांत सिंह मामले में बॉलीवुड पर दबाव डाला जा रहा था। इस दौरान सिंह ने सीधे तौर पर मातोश्री और सिल्वर ओक का जिक्र किया और परोक्ष रूप से मामले में उद्धव ठाकरे और शरद पवार की संलिप्तता का आरोप लगाया। इसलिए संभावना है कि इन मामलों में एक बार फिर आरोपों का सिलसिला और तेज हो जाएगा।
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पूर्व आईपीएस ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि देशमुख मामले दर्ज कराने वाले मास्टरमाइंड थे, लेकिन पवार और ठाकरे उनके पीछे थे। सिंह ने कहा कि सलिल देशमुख (अनिल देशमुख के चिरंजीव) एयरपोर्ट के पास फाइव स्टार ललित में बैठकर पुलिस तबादलों की डील कर रहे थे। पुलिस तबादलों को लेकर देशमुख द्वारा टिप्पणी की गई चिट्ठी मेरे पास है। सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि महाविकास आघाडी के कार्यकाल में विपक्षी नेताओं को फंसाने का दबाव था और जयकुमार रावल को भी फंसाने के लिए मीटिंग की गई थी।
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सिंह ने कहा कि विपक्ष के नेता फडणवीस को फंसाने के लिए तत्कालीन मविआ सरकार पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के माध्यम से दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं में प्रवीण दरेकर को फंसाने के लिए मातोश्री में बैठक हुई, जबकि गिरीश महाजन को फंसाने के लिए सिल्वर ओक में बैठक हुई। इस बीच परमवीर सिंह ने यह भी कहा है कि देशमुख लगातार कह रहे थे कि वे वसूली के निशाने पर हैं। सिंह ने कहा कि मेरे ऊपर आरोप लगने के बाद मैं इस बारे में बात कर रहा हूं। देशमुख लगातार निराधार बातें कहे जा रहे हैं।






