
मकर संक्रांति के मौके पर भारत के अलग-अलग हिस्सों में मनाया जाता त्योहार (सौ. एआई)
Makar Sankranti Celebrations: मकर संक्रांति सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं है बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता का उत्सव है। सूर्य के अत्तरायण होने पर पूरे देश में मकर संक्रांति का त्यौहार अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। अलग नामों के साथ पकवानों और परंपराओं में भी विभिन्नता देखी जा सकती है।
कहीं आसमान में पतंगबाजी होती है तो कहीं पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर दान पुण्य किया जाता है। भारत के अलग-अलग रंगों और परंपराओं का अद्भुत मिश्रण इस दिन देखा जा सकता है।
उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे मुख्य रूप से खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। लोग सुबह पवित्र नदी में डुबकी लगाते हैं और उसके बाद चावल, दाल, गुड़ और तिल का दान करते हैं। खाने में दही-चूड़ा और खिचड़ी का आनंद लिया जाता है।
गुजरात में इस दिन की रौनक देखते ही बनती है। इसे यहां उत्तरायण कहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का आयोजन होता है और पूरा आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। राजस्थान में इस दिन सुहागिन महिलाएं बयना देती हैं और तिल के लड्डू का वितरण होता है।
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मकर संक्रांति से एक दिन पहले पंजाब में ‘लोहड़ी’ मनाई जाती है। लोग अग्नि जलाकर उसमें तिल, रेवड़ी और मूंगफली अर्पित करते हैं। संक्रांति वाले दिन को यहां माघी कहा जाता है जहां लोग गुरुद्वारों में जाकर सेवा और अरदास करते हैं।
तमिलनाडु में यह पर्व पोंगल के रूप में चार दिनों तक मनाया जाता है। नए चावल और दूध से विशेष पकवान (शक्कर पोंगल) बनाया जाता है। यह मुख्य रूप से किसानों का त्यौहार है जिसमें प्रकृति और मवेशियों (बैल/गाय) की पूजा की जाती है।
असम में इसे माघ बिहू या भोगाली बिहू कहते हैं। लोग खेतों में मेजी जलाते हैं और पारंपरिक नृत्य व दावतों का आनंद लेते हैं।
पश्चिम बंगाल में इस पर्व को पौष संक्रांति कहते हैं। इस दिन लोग गंगासागर में स्नान के लिए जाते हैं। घरों में दूध, चावल और खजूर के गुड़ से पातिसापता और पीठे जैसे पकवान बनाए जाते हैं।
मकर संक्रांति हमें प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना सिखाती है। अलग नाम और अलग रीति-रिवाजों के बावजूद यह पर्व पूरे देश को शांति, समृद्धि और भाईचारे के सूत्र में पिरोता है।






