मकर संक्रांति 2026 पर क्या करें और क्या न करें? जानिए इस दिन से जुड़ी अहम बातें

Makar Sankranti Tips:मकर संक्रांति 2026: इस दिन क्या करें और क्या न करें, जानें धर्मिक नियम और दान, पूजा, तिल–गुड़ के महत्व से जुड़ी अहम बातें।
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मकर संक्रांति
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Makar Sankranti Donation: हर साल जनवरी के दूसरे सप्ताह में मनाया जाने वाला 'मकर संक्रांति का पावन पर्व भारतीय संस्कृति में सूर्य देवता को समर्पित एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व न केवल उत्तरायण के आगमन का प्रतीक है, बल्कि इसे नई शुरुआत, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के अवसर के रूप में भी देखा जाता है। ऐसे में आइए जानिए इस दिन क्या करें और क्या न करें?

मकर संक्रांति के दिन क्या करें

सूर्य देव की पूजा करें: सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करें और प्रार्थना करें।

दान-पुण्य करें: तिल, गुड़, चावल, उड़द दाल, वस्त्र या भोजन जरूरतमंदों को दें।

तिल–गुड़ का सेवन: यह परंपरा स्वास्थ्य, ऊर्जा और सौभाग्य लाती है।

साफ-सफाई रखें: घर और पूजा स्थान को स्वच्छ रखें, इससे सकारात्मक ऊर्जा आती है।

नई शुरुआत करें: इस दिन से नए काम शुरू करना शुभ माना जाता है।

क्या न करें:

खाली हाथ न निकलें: इस दिन दान और शुभ वस्तुएँ साथ ले जाना जरूरी है।

झूठ और बुरे विचार न रखें: नकारात्मकता से पुण्य कम होता है।

अनावश्यक बहस या लड़ाई न करें: परिवार और समाज में शांति बनाए रखें।

सूर्य को नजरअंदाज न करें: सूर्योदय पूजा करने में लापरवाही न बरतें।

अस्वास्थ्यकर भोजन न लें: हल्का और सात्विक भोजन इस दिन उपयुक्त है।

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति को हिंदू धर्म में बेहद खास माना गया है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी बदलाव को सूर्य का उत्तरायण होना कहा जाता है। उत्तरायण का समय सकारात्मक ऊर्जा, शुभ शुरुआत और आत्मिक जागरण से जोड़ा जाता है।

मान्यता है कि इस समय किया गया स्नान, दान और पूजा कई गुना फल देता है। धार्मिक दृष्टि से सूर्य को जीवन का आधार माना गया है। धरती पर जो भी जीव हैं, उनका अस्तित्व कहीं न कहीं सूर्य की रोशनी पर टिका हुआ है।

मकर संक्रांति पर सूर्य पूजा करने से व्यक्ति अपने जीवन में रोशनी, स्पष्ट सोच और आत्मविश्वास को अपनाने का संकल्प लेता है। यही वजह है कि इस दिन सूर्य को जल चढ़ाने को बहुत फलदायी माना गया है।

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