
अजित पवार का परिवार (डिजाइन फोटो)
Ajit Pawar NCP Successor: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष अजित पवार का बुधवार को एक दुखद विमान हादसे में 66 वर्ष की आयु में निधन हो गया। इस आकस्मिक वज्रपात ने न केवल उनके परिवार, बल्कि समूचे महाराष्ट्र और एनसीपी के राजनीतिक भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति का एक ऐसा चेहरा थे, जिन्होंने शासन और संगठन दोनों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी थी। वे शिंदे और फडणवीस सरकार से लेकर अपने चाचा शरद पवार की सरकारों में कुल पांच बार उपमुख्यमंत्री रहे। साल 2023 में जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दो गुटों में बंटी, तो चुनाव आयोग ने अजित पवार के धड़े को ही असली एनसीपी के रूप में मान्यता दी थी।
बारामती को अजित पवार का अभेद्य किला माना जाता है, जहां से वे बार-बार विधानसभा चुनाव जीतकर पहुंचे और अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनके निधन को राज्य की राजनीति और विशेषकर उनकी पार्टी के लिए एक अपूरणीय क्षति और बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।
अजित पवार के जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उनकी राजनीतिक विरासत को संभालने का है। पवार परिवार के भीतर से तीन प्रमुख नाम उत्तराधिकारी के रूप में देखे जा रहे हैं। इनमें उनके बड़े बेटे पार्थ पवार, छोटे बेटे जय पवार और उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के नाम सबसे आगे हैं।
हालांकि, पार्टी की कमान केवल परिवार तक सीमित रहेगी या किसी अनुभवी नेता को दी जाएगी, यह अभी भविष्य के गर्भ में है। एनसीपी में अजित पवार के अलावा भी कई ऐसे दिग्गज नेता मौजूद हैं जो इस विरासत को आगे ले जाने की क्षमता रखते हैं। इनमें प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल जैसे अनुभवी नेताओं के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं।
अजित पवार के निधन के बाद राजनीतिक गलियारों में एक और बड़ी संभावना पर चर्चा शुरू हो गई है। एनसीपी के दोनों धड़ों का विलय। हाल ही में हुए नगर निगम चुनावों में अजित पवार की एनसीपी और शरद पवार की एनसीपी (एसपी) ने पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में मिलकर चुनाव लड़ा था, जिसने राज्य की राजनीति में काफी हलचल पैदा कर दी थी।
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स्वयं अजित पवार ने एक इंटरव्यू के दौरान स्वीकार किया था कि परिवार का तनाव अब खत्म हो चुका है और दोनों पक्षों के कार्यकर्ता एकजुट होना चाहते हैं। हालांकि, चुनाव के बाद अब तक एकीकरण की कोई ठोस प्रक्रिया नहीं दिखी थी, लेकिन उनके निधन के बाद बदली हुई परिस्थितियों में कार्यकर्ताओं की भावनाओं को देखते हुए दोनों गुटों के फिर से एक साथ आने की अटकलें तेज हो गई हैं। अब आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगा कि ‘दादा’ के बाद एनसीपी का ऊंट किस करवट बैठता है।






