
चुनाव प्रचार करते उम्मीदवार लहू गजानन बालवडकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Lahu Balwadkar News: पुणे महानगरपालिका की आगामी चुनावी प्रक्रिया के मद्देनजर शहर के सभी वार्डों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पुणे महानगरपालिका चुनाव के प्रचार के दौरान प्रभाग क्रमांक 9 (सूस-बाणेर-बालेवाड़ी-पाषाण) शहर के सबसे चर्चित और तीव्र मुकाबलों में शामिल हो गया है। भाजपा के लहू बालवडकर और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार अमोल बालवडकर के बीच सीधी और कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है।
पुणे मनपा चुनावों की तैयारियां जबरदस्त गति से चल रही हैं। वार्ड क्रमांक 9 में भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार लहू गजानन बालवडकर सभी आयु वर्गों के बीच भरोसे का नाम बनकर उभर रहे हैं। बालवडकर लगातार गांव-भ्रमण, पदयात्राएं, नागरिकों से सीधा संवाद और मुलाकातें कर रहे हैं। यह सक्रियता केवल चुनाव तक सीमित नहीं रही है, बल्कि वे पिछले कई वर्षों से वार्ड के नागरिकों के निरंतर संपर्क में हैं। विशेष रूप से कोरोना के कठिन दौर में भी उन्होंने नागरिकों से सतत संपर्क बनाए रखते हुए मदद का कार्य किया।
पुणे के वार्ड 9 में जहां कई चेहरे सिर्फ चुनाव के समय दिखाई देते हैं, वहीं लहू बालवडकर ने बिना किसी पद के भी निरंतर जनसेवा की है। इसी का परिणाम है कि आज युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों का बड़ा वर्ग उनके नेतृत्व पर भरोसा जता रहा है।
महिलाओं के लिए महिला सम्मेलन, सशक्तिकरण हेतु विभिन्न शिविर, प्रतियोगिताएं और मार्गदर्शन कार्यक्रम; बच्चों और युवाओं के लिए सांस्कृतिक व खेल मंच ऐसे अनेक प्रयास उन्होंने किए हैं। इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियां संचालित करते हुए, बारह मल्हार पादुका को एक स्थान पर लाने जैसा ऐतिहासिक और श्रद्धा से जुड़ा कार्य भी उन्होंने सफलतापूर्वक पूरा किया है।
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इन सभी कार्यों के कारण वार्ड 9 में लहू बालवडकर की पहचान केवल एक उम्मीदवार की नहीं, बल्कि “हर किसी के अपने व्यक्ति” के रूप में बन गई है। विकास, सामाजिक प्रतिबद्धता और निरंतर जनसंपर्क के चलते वार्ड के तीनों वर्गों में उनकी लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ती दिखाई दे रही है।
पुणे महानगरपालिका चुनाव की पृष्ठभूमि में वार्ड 9 के राजनीतिक समीकरण खासे रोचक बन गए हैं। लहू गजानन बालवडकर को मिल रहा बढ़ता जनसमर्थन आगामी चुनाव में निर्णायक साबित होगा या नहीं, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर टिकी हुई है।






