
भाजपा नेता के. अन्नामलाई (सोर्स: सोशल मीडिया)
K Annamalai Reply Raj Thackeray: महाराष्ट्र की राजनीति में ‘रसमलाई’ और ‘पैर काटने’ जैसे बयानों ने हलचल मचा दी है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे की टिप्पणियों और उनके समर्थकों की धमकियों पर बीजेपी नेता के. अन्नामलाई ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने साफ कहा कि वे धमकियों से डरने वाले किसान के बेटे नहीं हैं।
चेन्नई में मीडिया से बातचीत के दौरान बीजेपी नेता के. अन्नामलाई ने एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे और उनके कार्यकर्ताओं को सीधी चुनौती दी। अन्नामलाई ने कहा कि ‘मैं मुंबई जरूर आऊंगा। अगर आपमें हिम्मत है, तो मेरे पैर काटकर दिखाइए।’ उन्होंने कड़े शब्दों में सवाल किया कि उन्हें धमकाने वाले आदित्य ठाकरे या राज ठाकरे आखिर होते कौन हैं?
अन्नामलाई ने गर्व से खुद को एक किसान का बेटा बताया और स्पष्ट किया कि वे ऐसी धमकियों के आगे झुकने वाले व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने एमएनएस के विरोध प्रदर्शनों और बयानों को पूरी तरह से अज्ञानता से भरा करार दिया।
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब राज ठाकरे ने अन्नामलाई के खिलाफ ‘रसमलाई’ वाली टिप्पणी की थी। इसके बाद एमएनएस कार्यकर्ताओं का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अन्नामलाई मुंबई आते हैं, तो उनके पैर काट दिए जाएंगे। अन्नामलाई ने इन हरकतों पर तंज कसते हुए कहा कि उनके खिलाफ केवल गाली देने के लिए विशेष सभाएं आयोजित की जा रही हैं, जो दर्शाती हैं कि उनकी अहमियत बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि वे डरते, तो अपने गांव में ही रहते, लेकिन वे मुंबई जैसे वैश्विक शहर में आने से पीछे नहीं हटेंगे।
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राजनीतिक घमासान केवल व्यक्तिगत बयानों तक सीमित नहीं रहा। राज ठाकरे ने गौतम अडानी पर निशाना साधते हुए एक नक्शा दिखाया और दावा किया कि पिछले एक दशक में केवल एक ही व्यवसायी अमीर हुआ है। इस पर बीजेपी के मुंबई प्रमुख अमित साटम ने सोशल मीडिया पर राज ठाकरे की अडानी के साथ एक पुरानी तस्वीर साझा की। साटम ने इसे ‘ढोंग और पाखंड की पराकाष्ठा’ बताया। बीजेपी का तर्क है कि राज ठाकरे एक तरफ अडानी से मुलाकात करते हैं और दूसरी तरफ राजनीतिक लाभ के लिए उन पर आरोप लगाते हैं।
अन्नामलाई ने अपनी सफाई में कहा कि उनके बयानों का गलत अर्थ निकाला जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि मुंबई को विश्व स्तरीय शहर कहना किसी भी तरह से मराठियों के योगदान को नकारना नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कामराज को भारत का महान नेता कहने से उनकी तमिल पहचान पर कोई असर नहीं पड़ता, वैसे ही मुंबई की प्रशंसा करना किसी भाषा या संस्कृति के खिलाफ नहीं है। आगामी बीएमसी चुनाव (BMC Polls) को देखते हुए इस विवाद को राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।






