IT Hub Pune में बेरोजगारी, ट्रैफिक और कुप्रबंधन बड़ा मुद्दा, घोषणापत्रों पर उठे सवाल

Pune: महानगरपालिका चुनाव नजदीक आते ही पुणे में एक बार फिर वादों की राजनीति तेज हो गई है, लेकिन बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली ने शहर की ‘स्मार्ट सिटी’ छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Pune Local Body Election Candidates Disqualified
पुणे महानगरपालिका (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune News In Hindi: 'ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट' 'आईटी हब', 'स्मार्ट सिटी' और 'सांस्कृतिक राजधानी' जैसे भारी-भरकम विशेषणों से नवाजा गया पुणे शहर आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

आगामी महानगर पालिका चुनावों की आहट होते ही शहर की गलियों में एक बार फिर आश्वासनों का बाजार सज गया है। विडंबना यह है कि मुद्दे वही पुराने हैं, बस राजनीतिक दलों ने उन्हें पेश करने के लिए 'शब्दों का नया लिब्बास' तैयार किया है। नागरिकों का आरोप है कि पुणे आज अनुशासनहीनता और कुप्रबंधन का जीवंत उदाहरण बन चुका है।

आईटी हब होने के बावजूद, शहर के मैदानों में लगने वाले रोजगार मेले युवाओं की लाचारी की कहानी बयां कर रहे हैं। डिग्री हाथ में लिए हजारों युवा निजी नौकरियों के लिए मीलों लंबी कतारों में खड़े हैं, जबकि चुनावी घोषणापत्रों में 'रोजगार सृजन' के आंकड़े केवल कागजों तक सीमित हैं।

बुनियादी ढांचे की अनदेखी के आरोप

शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली मुला-मुठा नदियों आज गंदे नाले में तब्दील हो चुकी हैं। 'नदी पुनरुद्धार के नाम पर करोड़ों के टेंडर ती पास हुए, लेकिन धरातल पर आज भी लाखों लीटर सीवेज बिना उपचार के नदी में मिल रहा है। यही हाल सड़कों का है; मुख्य सड़कों पर हर साल होने वाली 'लीपापोती' और आंतरिक सड़कों की अंतहीन खुदाई ने नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। मेट्रो और बीआरटी के बीच समन्वय की कमी के कारण ट्रैफिक जाम अस्व पुणे की स्थायी पहचान बन चुका है।

सांठगांठ और जवाबदेही का अभाव

नागरिकों का आरोप है कि नगरसेवक, नौकरशाही और टेकेदारों की त्रिकोणीय सांठगांठ' ने मनपा के खजाने को अपना निजी कोष समझ लिया है। ऑडिट रिपोर्ट पर कार्रवाई तो होती नहीं, लेकिन जवाबदेही से हर कोई बचना चाहता है। दूसरी ओर महिलाओं के लिए अपर्याप्त शौचालय, आवारा कुती का आतंक और बढ़ती नशाखोरी और क्राइम ग्राफ को लेकर कोई भी दल चर्चा नहीं करता, ठोस रोडमैप पेश करने के बजाय दे एक-दूसरे पर दोषारोपण में व्यस्त हैं।

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