पत्नी को पीटने वाले तालिबानी फरमान पर बोले अबू आजमी, 'मैं नहीं समझता किसी को मारना चाहिए'

Abu Asim Azmi Taliban Statement: तालिबान द्वारा घरेलू हिंसा को जायज ठहराने के कथित फरमान पर अबू आजमी ने दी प्रतिक्रिया। कहा- किसी को मारना सही नहीं, पर पूरी जानकारी के बाद ही बोलूंगा।
Abu Asim Azmi On Taliban Statement
Abu Asim Azmi On Taliban Statement (फोटो क्रेडिट-X)
Published on
Updated on

Domestic Violence Taliban News: समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र अध्यक्ष और विधायक अबू आसिम आजमी ने अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा घरेलू हिंसा को 'मंजूरी' देने वाले कथित फरमान पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तालिबान ने कथित तौर पर महिलाओं के साथ घरेलू स्तर पर मारपीट को तब तक जायज ठहराया है जब तक कि इससे 'हड्डियां न टूटें'। इस विवादित विषय पर मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए अबू आजमी ने स्पष्ट किया कि वे निजी तौर पर किसी भी तरह की हिंसा के पक्षधर नहीं हैं।

हालांकि, हमेशा की तरह अपने नपे-तुले अंदाज में आजमी ने कहा कि वे इस मामले पर तब तक विस्तार से टिप्पणी नहीं करेंगे जब तक कि वे इस कथित तालिबानी फरमान की पूरी सच्चाई और संदर्भ (Context) को न समझ लें। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है, जहां कुछ लोग उनके हिंसा के विरोध की सराहना कर रहे हैं, तो कुछ लोग इसे मुद्दे को टालने का प्रयास मान रहे हैं।

अबू आजमी का पक्ष: हिंसा के खिलाफ लेकिन स्पष्टीकरण का इंतजार

मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान अबू आजमी ने कहा, "मैं नहीं समझता कि किसी को भी मारना चाहिए। हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।" जब उनसे तालिबान के उस विशिष्ट बयान के बारे में पूछा गया जिसमें 'हड्डियां न टूटने' तक पीटने की बात कही गई है, तो उन्होंने कहा, "फिलहाल मुझे इस मुद्दे की पूरी जानकारी नहीं है। जब तक मैं यह न समझ लूं कि वास्तव में क्या कहा गया है और किस संदर्भ में कहा गया है, तब तक 'हड्डियां टूटने तक पीटना' जैसी बातों पर जवाब देना मेरे लिए सही नहीं होगा।"

तालिबानी फरमान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध

रिपोर्ट्स के अनुसार, तालिबान प्रशासन ने घरेलू हिंसा को लेकर कुछ ऐसे नियम औपचारिक रूप से पेश किए हैं जो मध्यकालीन सोच को दर्शाते हैं। इसमें कथित तौर पर कहा गया है कि पति अपनी पत्नी को अनुशासित करने के लिए बल का प्रयोग कर सकता है, बशर्ते वह गंभीर शारीरिक क्षति या हड्डियों के टूटने का कारण न बने। इस फरमान की दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी निंदा की है। भारत में भी इस मुद्दे पर राजनेताओं से उनकी राय पूछी जा रही है, जिस पर आजमी ने अपनी प्रतिक्रिया दी।

सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

अबू आजमी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में बजट सत्र चल रहा है और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर बहस जारी है। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का कहना है कि हिंसा को किसी भी शर्त या सीमा के साथ जायज नहीं ठहराया जा सकता। 'हड्डियां न टूटने' की शर्त लगाना अपने आप में एक अपराध को बढ़ावा देने जैसा है। अब देखना यह होगा कि इस मुद्दे पर पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद अबू आजमी का रुख क्या रहता है, क्योंकि उनके बयान अक्सर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में गहराई से विश्लेषित किए जाते हैं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com