पिंचिं मनपा पर भेदभाव के आरोप, छोटे घरों पर कार्रवाई, बड़े बिल्डरों को संरक्षण

Pune News: पिंचिं मनपा पर भेदभाव के आरोप लगे है। चिखली-तलवडे इलाके में अवैध प्रोजेक्ट्स तेजी से खड़े हो रहे है। छोटे घरों पर बुलडोजर, जबकि बड़े बिल्डरों को संरक्षण दिया जा रहा है।
पिंचिं मनपा (pic credit; social media)
पिंचिं मनपा (pic credit; social media)
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Maharashtra News: पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के 'फ' क्षेत्रीय कार्यालय में अवैध निर्माणों को लेकर दोहरे रवैये के आरोप लग रहे हैं। आम नागरिकों के छोटे-छोटे घरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है, जबकि बड़े बिल्डरों की बहुमंजिली अवैध इमारतों को प्रशासनिक संरक्षण मिलने की चर्चा है।

जानकारी के अनुसार, चिखली और तलवडे क्षेत्रों में बाजे नामक बिल्डर ने साझेदारी के नाम पर लगभग 10 से 15 अवैध इमारतें खड़ी कर ली हैं। इन इमारतों में फ्लैट बेचे जा रहे हैं और कई परिवार पहले ही ठगी का शिकार हो चुके हैं। शिकायतें दर्ज होने के बावजूद महानगरपालिका का अतिक्रमण विभाग कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए है।

वलवडे के गट नंबर 139 की 26 आर जमीन पर भी बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हो रहा है। यहां करीब 30 फ्लैट बिना अनुमति बनाए गए और उनकी बिक्री भी शुरू हो चुकी है। सहयोगनगर और टीवर लाइन क्षेत्र में भी 20 से अधिक अवैध इमारतें खड़ी की गई हैं। इसी तरह देवधर क्षेत्र और मोने बस्ती में भी बिना अनुमति बहुमंजिली इमारतें खड़ी की जा रही हैं।

मकानों की बिक्री और किराए पर देने का काम खुलेआम चल रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह सब संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है। चर्चा यह भी है कि बीट निरीक्षक निर्माण कार्य में स्लैब पड़वाने के हिसाब से रिश्वत लेते हैं।

महानगरपालिका अधिनियम की धारा 261, 264, 267 और 478 के तहत क्षेत्रीय अधिकारियों को अवैध निर्माण तोड़ने का अधिकार है। इसके बावजूद कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित है। चार मंजिला इमारत तोड़ने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि पोकलेन मशीन ले जाने से टाला जाता है।

मनपा आयुक्त शेखर सिंह ने अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। लेकिन जमीन पर इन आदेशों का असर दिखाई नहीं दे रहा है। आम नागरिकों का आरोप है कि जिनके पास राजनीतिक संरक्षण नहीं है, उन्हीं के घर तोड़े जाते हैं, जबकि बड़े बिल्डरों की इमारतों पर हाथ नहीं डाला जाता।

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