
अजित पवार के अंमित संस्कार की तस्वीर (सोर्स: सोाशल मीडिया)
Ajit Pawar Dashkriya News: महाराष्ट्र की राजनीति के एक युग का अंत करने वाले विमान हादसे के बाद, अब पवार परिवार ने एक महत्वपूर्ण और प्रगतिशील निर्णय लिया है। राज्य के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद होने वाले पारंपरिक ‘दशक्रिया विधि’ (10वां दिन) और ‘तेरहवीं’ जैसे सार्वजनिक अनुष्ठान आयोजित नहीं किए जाएंगे। पवार परिवार ने सभी आवश्यक धार्मिक क्रियाएं मात्र तीन दिनों के भीतर ही संपन्न कर ली हैं और अब कोई भी सार्वजनिक या बड़ा धार्मिक आयोजन नहीं किया जाएगा।
ज्ञात हो कि 28 जनवरी 2026 को बारामती आते समय एक भीषण विमान हादसे में अजित पवार सहित पांच लोगों का निधन हो गया था। इस दुर्घटना ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया था। निधन के अगले ही दिन, 29 जनवरी को बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया था। इसके पश्चात 30 जनवरी को अस्थि विसर्जन का कार्यक्रम सोनगांव स्थित कऱ्हा-नीरा संगम पर संपन्न हुआ।
आमतौर पर किसी भी हिंदू परिवार में दशक्रिया विधि और तेरहवीं का विशेष महत्व होता है। दशक्रिया निधन के दसवें दिन व तेरहवीं 13 दिन बाद होती है। हालांकि अजित पवार के परिवार ने इन परंपराओं को संक्षिप्त करते हुए प्रगतिशीलता की मिसाल पेश की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार परिवार ने तीसरे दिन अस्थि विसर्जन के समय ही सभी जरूरी विधियां पूरी कर ली थीं। इसका मतलब अब अजित पवार की दशक्रिया या तेरहवीं नहीं होगी। हालांकि, इस निर्णय पर अब तक उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, पार्थ पवार या जय पवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन बारामती में चर्चा है कि परिवार ने प्रगतिशील विचारों को अपनाते हुए यह कदम उठाया है।
अजित पवार के पैतृक निवास काटेवाडी में आज सांत्वना सभा का आयोजन किया गया है। दोपहर 4 बजे तक चले इस कार्यक्रम में राजनीतिक दिग्गजों और आम जनता की भारी भीड़ अपने नेता को श्रद्धांजलि देने पहुंची। उल्लेखनीय है कि अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने 31 जनवरी को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उन्होंने हाल ही में कराड जाकर यशवंतराव चव्हाण की समाधि के दर्शन भी किए।
अजित पवार के निधन के बाद एसीपी के दोनों गुटों के विलय को लेकर राजनीतक बयानबाजी जोरों पर है। शरद पवार गुट के नेताओं कहना है कि अजित पवार दोनों गुटों के विलय के बारे में सोच रहे थे, और शरद पवार के चर्चा में यह साफ हो गया था। यहां तक कहा जा रहा था कि विलय को लेकर 12 फरवरी को बड़ा फैसला होने वाला था। इस पर जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार से पूछा गया ताे उन्होंने कहा कि ने कहा कि हमने अजित दादा के बारे में खबर सुनी है; यह कहना मुश्किल है कि खबर सच है या यह कोई सपना है। यह दुख और आत्म-मंथन का समय है। इसलिए, मैं 13 दिनों तक राजनीति पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।
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रोहित पवार ने कहा कि मैं 9 तारीख को अजित पवार की तेरहवीं की रस्म तक किसी भी राजनीतिक चर्चा में शामिल नहीं होऊंगा। अजीत दादा की तेरहवीं की रस्म के बाद, मैं राजनीतिक मामलों पर टिप्पणी करूंगा, और सभी सवालों के जवाब विस्तार से और साफ-साफ दिए जाएंगे।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा तेज है कि पार्थ पवार को राज्यसभा भेजा जा सकता है। सुनेत्रा पवार की राज्यसभा की शेष अवधि (4 जुलाई 2028 तक) के बजाय, पार्थ पवार को 6 साल के पूर्ण कार्यकाल वाली सीट पर भेजने की संभावना जताई जा रही है।






