‘आपकी हिम्मत कैसे हुई…’, केदार जाधव की शिकायत पर SC ने रोहित पवार को लगाई फटकार, क्या है MCA सदस्यता विवाद ?
MCA Membership Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने MCA में अवैध रूप से सदस्य बढ़ाने पर विधायक रोहित पवार को फटकार लगाई है। कोर्ट के कड़े रुख के बाद पवार ने अपनी याचिका वापस ले ली है।
- Written By: आकाश मसने
केदार जाधव व रोहित पवार (डिजाइन फोटो)
Supreme Court Warning Rohit Pawar: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार को महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के सदस्यता विवाद मामले में देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी फटकार झेलनी पड़ी है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त लहजे में रोहित पवार से पूछा, “आपकी इतनी हिम्मत कैसे हुई कि बिना अदालत की अनुमति और संविधान में संशोधन किए इतने सदस्यों को अवैध रूप से जोड़ दिया?” अदालत की इस नाराजगी के बाद रोहित पवार ने अपनी याचिका वापस लेना ही बेहतर समझा।
क्या है महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन सदस्यता विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब भारतीय क्रिकेटर और भाजपा नेता केदार जाधव ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। MCA के सदस्य केदार जाधव ने आरोप लगाया कि रोहित पवार ने एसोसिएशन पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए सदस्यों की संख्या को मनमाने ढंग से 154 से बढ़ाकर 571 कर दिया है। इन नए सदस्यों में 400 ‘लाइफ मेंबर्स’ शामिल हैं, जिनके बारे में दावा किया गया है कि वे नियमों का उल्लंघन कर जोड़े गए हैं।
परिवार और कर्मचारियों को सदस्य बनाने के आरोप
केदार जाधव द्वारा प्रस्तुत विवरणों के अनुसार, MCA की नई सदस्य सूची में रोहित पवार के परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और उनकी निजी कंपनियों के कर्मचारी शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इस सूची में रोहित पवार की पत्नी कुंती पवार, ससुर सतीश मगर, और उनकी चचेरी बहन व सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले के नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा, विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े लोगों और राजनीतिक समर्थकों को भी चुनाव से ठीक पहले सदस्यता दी गई ताकि पवार का वोट बैंक मजबूत हो सके, जिसे केदार जाधव ने ‘शक्ति का दुरुपयोग’ करार दिया है।
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अदालत की कड़ी चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गहरी आपत्ति जताई कि रोहित पवार के नेतृत्व में इस तरह की अवैध गतिविधियां कैसे होने दी गईं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “या तो आप अपनी याचिका वापस लें, अन्यथा हम इसे खारिज कर देंगे।” सर्वोच्च न्यायालय के इस रुख ने रोहित पवार के लिए राहत की सभी उम्मीदें खत्म कर दीं। गौरतलब है कि इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी 6 जनवरी 2026 को होने वाले MCA चुनावों पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जिसे रोहित पवार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत न मिलने और याचिका वापस लेने के बाद अब सबकी नजरें बॉम्बे हाईकोर्ट पर टिकी हैं। इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार, 4 फरवरी को बॉम्बे हाईकोर्ट में होनी है। इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की क्रिकेट राजनीति में भूचाल ला दिया है और शरद पवार गुट के युवा नेता रोहित पवार के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
