कोर्ट कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, BMC आयुक्त को फटकार

BMC Election 2026 से पहले कोर्ट कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी पर लगाने के आदेश पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। फटकार के बाद BMC आयुक्त भूषण गगरानी ने आदेश वापस ले लिए।
Bombay High Court
मुंबई उच्च न्यायालय (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Mumbai News In Hindi: बीएमसी के आयुक्त एवं आगामी नगर निगम चुनावों के लिए जिला निर्वाचन अधिकार भूषण गगरानी को बॉम्बे हाईकोर्ट ने कोर्ट कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी में तैनात करने के मामले में कड़ी फटकार लगाई है।

हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद बीएमसी आयुक्त ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए संबंधित आदेश वापस ले लिए हैं। यह मामला तब सामने आया जब बीएमसी प्रशासन ने मुंबई की अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को चुनावी कार्य के लिए तैनात करने के निर्देश जारी किए।

इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और अदालती कर्मचारियों खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेते को नहीं करनी पड़ेगी हुए सवाल उठाया कि क्या चुनावी ड्यूटी न्यायमूर्ति गौतम अंखड की बीएमसी आयुक्त को न्यायिक कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी पर बुलाने का अधिकार है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायालयों के कर्मचारी चुनावी कार्य से सामान्यतः मुक्त रखे जाते हैं और इस संबंध में वर्ष 2008 में एक प्रशासनिक निर्णय भी लिया गया था। अदालत ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी के रूप में भी बीएमसी आयुक्त के पास न्यायिक स्टाफ को तैनात करने का कोई संवैधानिक या कानूनी अधिकार नहीं है।

"अनजाने में हुई गलती"

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद बीएमसी आयुक्त भूषण गगरानी ने अदालत को बताया कि यह एक "अनजाने में हुई गलती थी और सभी संबंधित पत्र तुरंत वापस ले लिए गए हैं। साथ ही, कार्यालय के माध्यम से जारी किए गए किसी भी अनुरोध को भी रद्द कर दिया गया है। अदालत ने निर्देश दिया कि चुनावी कार्य के लिए वैकल्पिक कर्मचारियों की व्यवस्था की जाए और भविष्य में इस तरह की गलती न दोहराई जाए यह मामला प्रशासनिक अधिकारों और न्यायिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर अहम माना जा रहा है।

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