

Nagpur Municipal Transport Department Loss: नागपुर महानगरपालिका का परिवहन विभाग हमेशा से ही किसी न किसी विवाद का केंद्र बिंदु रहा है। यहां तक कि परिवहन विभाग प्रशासन के लिए संचालन भले ही घाटे का सौदा न हो लेकिन कभी भी खर्चा कम करने की दिशा में कदम नहीं उठाया गया।
इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि हाल ही में परिवहन समिति के सामने प्रशासन द्वारा 2 माह का लेखा-जोखा रखा गया। जहां कमाई तो केवल 8 करोड़ होने की जानकारी उजागर की गई किंतु खर्चा 20 करोड़ के पार होने का सनसनीखेज खुलासा भी किया गया जिससे परिवहन विभाग के लिए फिर एक बार 'आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया' की कहावत चरितार्थ होती दिखाई दी।
महानगरपालिका के परिवहन विभाग के वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती आंकड़ों ने विभाग की चिंताजनक आर्थिक स्थिति की तस्वीर साफ कर दी है। हाल ही में उजागर आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार शहर की परिवहन व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है लेकिन हकीकत यह है कि विभाग की टिकटों से होने वाली कमाई के मुकाबले उसका खर्च दोगुने से भी काफी अधिक है। दस्तावेज से प्राप्त जानकारी के अनुसार परिवहन विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में मनपा निधि से कुल 160 करोड़ रुपये का फंड मंजूर किया गया है।
इन बेतहाशा खचों और भारी अंतर को देखते हुए अब प्रशासन द्वारा इन खर्चों का पूरा लेखा-जोखा परिवहन समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। दस्तावेज के अनुसार समिति के सामने इन खचौँ का विस्तृत विवरण रखकर उसे मान्यता प्रदान करने और इन खर्चों के लिए 'कार्योत्तर वित्तीय मान्यता' भी प्रदान की गई है।
परिवहन समिति इन भारी खचों पर क्या रुख अपनाती है और शहर की इस घाटे वाली परिवहन व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें लगी हुई हैं।
आधिकारिक प्रस्ताव में अप्रैल और मई 2026 के शुरुआती महीनों की टिकट बिक्री से प्राप्त राजस्व (कमाई) और विभिन्न मदों में हुए खर्च का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है जो विभाग के भारी घाटे को दर्शाता है।
अप्रैल 2026 में विभाग को सिटी बसों की टिकट बिक्री से कुल 8,32,47,921 रुपये (लगभग 8.32 करोड़ रुपये) का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके विपरीत इसी महीने में विभाग का विभिन्न लेखाशीषों (ac-counting heads) के तहत कुल खर्च 20,95,23,951,50 रुपये (लगभग 20.95 करोड़ रुपये) रहा।
मई 2026 में टिकट बिक्री से होने वाली आय में और भी मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह 8,28,82,764 रुपये (लगभग 8.28 करोड़ रुपये) रही। वहीं इस महीने का कुल खर्च 20,52,66,935.50 रुपये (लगभग 20.52 करोड़ रुपये) दर्ज किया गया।