
शरद पवार के साथ अजित पवार (File Photo)
Maharashtra Politics: भविष्य क्या लेकर आता है, यह केवल समय ही तय करता है। इंसान अपनी जिंदगी के लिए योजनाएं बना सकता है, लेकिन उनकी सफलता की कोई गारंटी नहीं होती। ऐसा ही कुछ हुआ अजित पवार के साथ। अपने राजनीतिक गुरु और चाचा शरद पवार से अलग होकर अजित पवार ने अपने राजनीतिक भविष्य के लिए ठोस योजना बनाई थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों का विलय तय होने वाला था। शरद पवार और अजित पवार ने इसके लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं और मर्जर की तारीख भी तय हो चुकी थी। एक भव्य कार्यक्रम में दोनों गुटों के एक होने की घोषणा होनी थी।
लेकिन किस्मत ने अचानक खेल बदल दिया। नगर निकाय चुनाव प्रचार के दौरान अजित पवार चार्टर प्लेन से बारामती जा रहे थे, तभी विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। कुछ ही देर बाद खबर आई कि अजित दादा इस दुनिया में नहीं रहे। इससे महाराष्ट्र की राजनीति को गहरा झटका लगा, और पवार परिवार पर भी भारी धक्का पड़ा।
news18 की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि NCP विलय की प्रक्रिया अब भी जारी है, बस तारीख आगे बढ़ सकती है। दोनों गुटों का विलय लगभग अंतिम चरण में था और 8 फरवरी को औपचारिक घोषणा की प्लानिंग थी। अजित पवार के असामयिक निधन से प्रक्रिया पर असर पड़ा है, लेकिन पार्टी नेताओं का कहना है कि मर्जर की दिशा अभी भी वही है और आगे बढ़ेगी।
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, जिला परिषद चुनावों के नतीजों के बाद दोनों गुटों के विलय की औपचारिक घोषणा की योजना बनाई गई थी। अजित पवार के निधन से समीकरण बदल गए, लेकिन बारामती में वरिष्ठ नेताओं की आपात बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा जारी रही। नेताओं का मानना है कि अजित पवार की अनुपस्थिति से समय सीमा प्रभावित हो सकती है, पर बातचीत पूरी तरह नहीं रुकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों गुटों का विलय शरद पवार नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) को सरकार में शामिल होने का रास्ता खोल सकता है। फिलहाल अजित पवार गुट महायुति सरकार का हिस्सा है, जबकि शरद पवार गुट महाविकास आघाड़ी में कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के साथ है।
अजित पवार दोनों गुटों के बीच संवाद की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते थे। एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ विधायक जयंत पाटिल और पार्टी अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने पुष्टि की कि विलय बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी। कैबिनेट फेरबदल और नए चेहरों को शामिल करने जैसे पहलुओं पर भी अनौपचारिक चर्चा चल रही थी।
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पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में दोनों गुटों ने मिलकर चुनाव लड़ा था, जिससे विश्वास बहाली हुई और विलय की राह तैयार हुई। खबरों के अनुसार, 8 फरवरी को इस दिशा में बड़ा ऐलान होना था, लेकिन अजित पवार के निधन से प्रक्रिया में थोड़ी देरी संभव है।






