तपोवन के 1800 पेड़ बने भाजपा की ‘अग्निपरीक्षा’, चुनाव में अकेली पड़ी पार्टी; तपोवन बना चुनावी रणक्षेत्र

Tree Cutting Issue: तपोवन में पेड़ों की कटाई BJP के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गई है। पर्यावरण बनाम विकास की इस लड़ाई में विपक्ष के साथ-साथ महायुति के सहयोगी दल भी BJP से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं।
The 1800 trees of Tapovan have become BJP's 'trial by fire', leaving the party isolated in the elections; Tapovan has turned into an electoral battleground.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
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Simhastha Kumbh Development: नासिक महानगरपालिका चुनाव के प्रचार ने अब एक नया और बेहद संवेदनशील मोड़ ले लिया है। तपोवन क्षेत्र में 1800 पेड़ों की संभावित कटाई भाजपा के लिए चुनावी 'अग्निपरीक्षा' बन गई है। जहां एक ओर विपक्षी दल 'ठाकरे ब्रांड' के तले एकजुट होकर प्रहार कर रहे हैं, वहीं महायुति के साथी दल एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने भी इस मुद्दे पर भाजपा से पल्ला झाड़ लिया है। चुनावी बिसात पर भाजपा फिलहाल इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह अलग-थलग (एकाकी) नजर आ रही है।

विकास बनाम विनाश की लड़ाई वर्ष 2027 के सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के नाम पर प्रशासन ने तपोवन में साधुग्राम बनाने का जो खाका खींचा है, उसने पूरे शहर में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। 1800 पेड़ों को काटने की योजना ने पर्यावरण प्रेमियों को सड़क पर उतार दिया है।

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के सख्त रुख ने प्रशासन के हाथ बांध दिए हैं, जिससे भाजपा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। 'सह्याद्री देवराई' के माध्यम से लाखों पेड़ लगाने वाले अभिनेता सयाजी शिंदे ने इसे नासिक की अस्मिता से जोड़ते हुए कड़ा विरोध जताया है।

गिरीश महाजन का 'डैमेज कंट्रोल'

विवाद बढ़ता देख कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन ने हैदराबाद से हजारों नए पौधे मंगाकर वृक्षारोपण शुरू किया है ताकि जनता का गुस्सा शांत किया जा सके, हालांकि, राज ठाकरे ने इस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा का चरित्र 'पेड़ काटो और गमले लगाओ' जैसा हो गया है। राज ने महाजन पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस पार्टी ने अपने पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं को 'काट' कर दरकिनार कर दिया, उनसे पेड़ों की रक्षा की उम्मीद करना बेमानी है।

बिल्डर प्रेम या कुंभ का बहाना ?

शिवसेना नेता और सांसद संजय राऊत ने इस विवाद को एक नया मोड़ देते हुए गंभीर आरोप लगाया है। राऊत का कहना है कि कुंभ मेला और साधुग्राम केवल एक दिखावा है, असल में भाजपा के शीर्ष नेता एक प्रभावशाली 'निर्माण व्यवसायी' को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए तपोवन की बेशकीमती जमीन खाली करवा रहे हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि आस्था की आड़ में पर्यावरण और भ्रष्टाचार का यह खेल अब और नहीं चलेगा।

महायुति में दरार और शिंदे-अजित पवार का रुख

नासिक की जनता के सेंटिमेंट को भांपते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री अजित पंवार की पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों ने भी इस कटाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महायुति के भीतर ही इस 'बगावत' ने भाजपा की चुनावी रणनीति को तगड़ा झटका दिया है। शिंदे गुट के नेताओं का आंदोलनकारियों के साथ मंच साझा करना यह साफ संकेत है कि वे चुनाव में भाजपा के 'पाप' का हिस्सा नहीं बनना चाहते।

रविवार को फडणवीस की सभाः आर या पार !

सबकी नजरें गोदाघाट मैदान पर होने वाली देवेंद्र फडणवीस की विशाल सभा पर टिकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फडणवीस को न केवल विपक्ष के हमलों का जवाब देना होगा, बल्कि अपने नाराज 'मित्रों' और जनता को यह समझाना होगा। यदि फडणवीस इस मुद्दे पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दे पाते, तो भाजपा को इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

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