Maharashtra Local Body Election: अंबरनाथ में शिंदे गुट का मास्टर स्ट्रोक, भाजपा को करारी पटखनी

Thane News: अंबरनाथ नगर परिषद में आखिरी समय पर समीकरण बदले। श्रीकांत शिंदे के मास्टर स्ट्रोक से शिंदे गुट ने सरकार बनाई और भाजपा को बड़ा राजनीतिक झटका लगा।
Dr Shrikant Shinde
डॉ श्रीकांत शिंदे (सौ. सोशल मीडिया )
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Ambernath News In Hindi: मुंबई से सटे ठाणे के अंबरनाथ नगर परिषद में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की सरकार होगी। यहां सत्ता हासिल करने के लिए महायुति में शामिल बीजेपी व शिंदे सेना के बीच महा धोबीपछाड़ का खेल चल रहा है।

इस नगर परिषद में बहुमत के लिए 30 सीटों की दरकार थी लेकिन शिंदे सेना सिर्फ 27 सीटें ही हासिल कर सकी। वहीं 16 सीट जीतने वाली बीजेपी ने सत्ता से शिंदे सेना को आउट करने के लिए करने के लिए कांग्रेस से निलंबित 12 पार्षद को अपनी पार्टी में शामिल कर बड़ा खेला किया था।

बीजेपी की कोशिश थी कि वह कांग्रेस के 12 व अजीत पवार की राकां के 4 पार्षदों की मदद से सरकार बनाने में कामयाब हो जाएगी लेकिन डीसीएम शिंदे के पुत्र सांसद श्रीकांत शिंदे ने नहले पर दहला मारते हुए अजीत पवार गुट के 4 पार्षदों को अपने खेमे में करते हुए सरकार बना ली। इस तरह सत्ता हासिल करने के इस खेल में शिंदे गुट ने बीजेपी को बड़ी पटखनी दे दी है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण को इस पूरे घटनाक्रम से करारा झटका लगा।

शिंदे पुत्र ने बाजी पलटी

डिप्टी सीएम शिंदे के पुत्र श्रीकांत शिंदे अंबरनाथ से सांसद हैं। ऐसे में जब उन्हें लगा कि उनके क्षेत्र में बीजेपी की घुसपैठ बढ़ रही है तो उन्होंने बाजी पलट दी। अंबरनाथ म्युनिसिपल काउंसिल में शिवसेना के 27 पार्षद चुने गए हैं।

श्रीकांत ने मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए अजीत पवार की राकां के चार कॉर्पोरेटर को अपने खेमे में कर लिया। इसके अलावा एक निर्दलीय ने भी उनका समर्थन कर दिया। इस तरह अब शिंदे सेना के पास कुल 32 पार्षदों का समर्थन है। श्रीकांत ने अंबरनाथ नगर परिषद में सरकार बनाने का दावा किया और इस बारे में एक लेटर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को दिया है।

शिंदे व चव्हाण की साख दांव पर

  • अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वींद्र चव्हाण और शिवसेना शिंदे गुट के सांसद श्रीकांत शिंदे की साख दांव पर लगी थी।
  • यहां मेयर पद के लिए शिवसेना शिंदे ग्रुप की मनीषा वालेकर और बीजेपी की तेजश्री करंजुले पाटिल के बीच कड़ा मुकाबला था।
  • बीजेपी की करंजुले जीतीं लेकिन यहां सबसे ज्यादा पार्षद शिवसेना के हैं। ऐसे में अब मेयर करंजुले को अपने हर फैसले के लिए शिंदे सेना पर निर्भर रहना पड़ेगा क्योंकि सत्ता की चाबी उनके पास होगी।
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