

Health Tips: हम में से ज्यादातर लोग जानते हैं कि सुबह पानी पीना फायदेमंद है लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत तरीके से पिया गया पानी आपकी किडनी और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। आयुर्वेद में पानी पीने के खास नियम बताए गए हैं जिन्हें उषापान कहा जाता है।
पानी जीवन है लेकिन आयुर्वेद के अनुसार इसे औषधि की तरह लेना चाहिए। अगर आप सुबह उठते ही बिस्तर पर चाय के बजाय पानी पीते हैं तो आप अपनी सेहत की ओर पहला कदम बढ़ा चुके हैं। मगर फिट रहने के लिए केवल पानी पीना काफी नहीं है उसे सही समय और सही ढंग से पीना जरूरी है।
आयुर्वेद के अनुसार सूर्योदय से पहले यानी ब्रह्म मुहूर्त में पानी पीना सबसे लाभकारी है। उठते ही बिना कुल्ला किए या बिना ब्रश किए पानी पीना चाहिए। इसे उषापान कहते हैं। रात भर आपके मुंह में जमा होने वाली लार क्षारीय होती है जो पेट के एसिड को शांत करती है और पाचन को दुरुस्त रखती है। शुरुआती तौर पर 1-2 गिलास से शुरुआत करें और धीरे-धीरे इसे 1 लीटर तक ले जाएं।
आजकल लोग फ्रिज का ठंडा पानी पीना पसंद करते हैं जो आयुर्वेद में जहर समान माना गया है। सुबह हमेशा हल्का गुनगुना पानी ही पिएं। गुनगुना पानी आंतों में जमा गंदगी (मल) को साफ करने में मदद करता है और शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। इससे वजन घटाने में भी मदद मिलती है।
अगर आप पानी को रात भर तांबे के बर्तन में रखकर सुबह पीते हैं तो यह सोने पर सुहागा है। तांबे में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो पानी को शुद्ध करते हैं और शरीर के तीन दोषों वात, पित्त और कफ को संतुलित करते हैं। यह आपकी त्वचा में चमक लाता है और जोड़ों के दर्द में राहत देता है।
अक्सर लोग जल्दबाजी में खड़े होकर पानी पीते हैं जिससे पानी सीधे पेट के निचले हिस्से में तेजी से जाता है और किडनी व जोड़ों को नुकसान पहुंचाता है। पानी हमेशा बैठकर और घूंट-घूंट करके पीना चाहिए। इससे लार पानी के साथ मिलकर पेट में जाती है और एसिडिटी की समस्या खत्म होती है।
भोजन के तुरंत बाद ज्यादा पानी न पिएं। आयुर्वेद कहता है भोजन के अंत में पानी पीना जहर के समान है। खाने और पानी के बीच कम से कम 45 मिनट का अंतर जरूर रखें।