प्रकृति की मार के बावजूद, नासिक जिले के अंगूरों ने भरी ‘विदेशी उड़ान’, किसानों को राहत
Grape Farmers: नासिक जिले से अंगूर निर्यात सीजन की शुरुआत 30 टन की पहली खेप के साथ हुई है। नीदरलैंड और जर्मनी भेजे गए अंगूरों को औसतन 150 रुपये प्रति किलो का भाव मिला है।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया AI )
Nashik Grapes Export: लासलगांव/निफाड प्रकृति की बेरुखी, बढ़ती लागत और अनिश्चित मौसम की चुनौतियों को मात देते हुए नासिक के अंगूरों ने एक बार फिर वैश्विक बाजार में अपनी मिठास का लोहा मनवाया है। चालू सीजन की पहली 30 टन अंगूरों की खेप नीदरलैंड और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों के लिए रवाना कर दी गई है।
निफाड क्षेत्र के निर्यातक्षम बागों से दो कंटेनर भरकर भेजी गई इस खेप के साथ ही जिले के अंगूर सीजन का शानदार ‘श्रीगणेश’ हो गया है। शुरुआत में ही औसतन 150 रुपये प्रति किलो का संतोषजनक भाव मिलने से संकट में फंसे अंगूर उत्पादकों को बड़ी राहत मिली है।
नासिक के अंगूरों के स्वाद, रंग और टिकाऊपन की यूरोपीय बाजारों में हमेशा भारी मांग रहती है। लंबे समय तक हुई बारिश के कारण उत्पादन पर असर पड़ा, लेकिन बचे हुए बागों के अंगूर ‘रेसिड्यू-फ्री’ (अवशेष मुक्त) परीक्षण में सफल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार पैकिंग और कोल्ड चेन मैनेजमेंट के कारण व्यापारियों ने पहले चरण में ही नासिक के अंगूरों को पसंद किया है।
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- आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और गुणवत्ता से समझौता न करने के कारण ही वे वैश्विक बाजार में टिक पाए हैं। हालांकि, बढ़ते मौसम जोखिम को देखते हुए फसल बीमा योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है।
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– किसान, वृषभ भंडारी और सचिन वाघ
अंगूर निर्यात के मुख्य आंकड़े
| विवरण | ताजा स्थिति / जानकारी |
|---|---|
| सीजन | 2025–26 |
| यूरोपीय निर्यात का आगाज | नीदरलैंड और जर्मनी के लिए पहली 30 टन की खेप रवाना |
| प्रारंभिक बाजार दर | ₹150 प्रति किलो (निर्यात गुणवत्ता) |
| पिछला रिकॉर्ड (2024–25) | ₹3,050 करोड़ की विदेशी मुद्रा कमाई |
| कुल निर्यात पंजीकरण | महाराष्ट्र और कर्नाटक से 24,724 बागों का रजिस्ट्रेशन |
| प्रमुख निर्यातक क्षेत्र | नासिक जिला (विशेषकर निफाड़ और लासलगांव बेल्ट) |
