छोटे उद्योग ही हैं देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़, ‘इंडिया बाय MSME’ कार्यक्रम में मंत्री लोढ़ा का दावा
Mangalprabhat Lodha: मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने ‘इंडिया बाय MSME’ कार्यक्रम में कहा कि छोटे उद्योग भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, जबकि ‘महा दृष्टि’ परियोजना को 4,000 करोड़ की मदद मिली।
- Written By: आंचल लोखंडे
Mangalprabhat Lodha statement (सोर्सः सोशल मीडिया)
MSME Contribution GDP: कौशल्य विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने रविवार को कहा कि प्राचीन काल में भारत के हर घर में छोटे-छोटे उद्योग संचालित होते थे और इसी कारण भारत को ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) आज भी भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। जब तक छोटे व्यापारी और लघु उद्योग सशक्त नहीं होंगे, तब तक देश का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।
बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में आयोजित “इंडिया बाय एमएसएमई” कार्यक्रम में मंत्री लोढ़ा ने बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि कौशल विभाग की ‘महा दृष्टि’ परियोजना को एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) से 4,000 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है। यह राशि उन उद्यमियों को दी जाएगी, जो छोटे कारखाने स्थापित करना चाहते हैं। छोटे व्यापारियों को सशक्त बनाकर भारत को मजबूत बनाने का लक्ष्य सरकार ने निर्धारित किया है।
रोजगार और जीडीपी में अहम भूमिका
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के प्रबंध निदेशक रवि रंजन ने कहा कि उद्यम पोर्टल पर 7.7 करोड़ से अधिक एमएसएमई पंजीकृत हैं, जो लगभग 33 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं। देश की जीडीपी में इस क्षेत्र का योगदान लगभग 30 प्रतिशत और कुल निर्यात में 45 प्रतिशत है।
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भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (एसआईडीबीआई) के अध्यक्ष मनोज मित्तल ने कहा कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक, जीएसटी और स्टार्टअप संस्कृति ने एमएसएमई क्षेत्र को नई ऊर्जा दी है। देश को 5 या 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए एमएसएमई को राष्ट्रीय प्राथमिकता देना जरूरी है।
एक राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत
यूग्रो कैपिटल के संस्थापक सचिंद्र नाथ और एटर्नल कॉर्पोरेट मीडिया के सीईओ आलोक रंजन तिवारी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में बैंक, एनबीएफसी, फिनटेक, म्यूचुअल फंड और रेटिंग एजेंसियों के दिग्गजों ने भाग लिया। इसे एक सम्मेलन नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत बताया गया।
