हवा से पावर बनाने वाली नई तकनीक, क्या अब फैक्ट्री का खर्च होगा कम?

Electricity from Compressed Air: रिसर्चर्स ने बिजली उत्पादन का एक ऐसा अनोखा तरीका पेश किया है, जिसमें न तारों की जरूरत पड़ती है और न ही किसी पारंपरिक जनरेटर की। और इसके बिना ही बिजली को पैदा होगी।
new technology that generates power from air will this reduce factory costs
Light Blub in Room (Source. Freepik)
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Energy Solutions: रिसर्चर्स ने बिजली उत्पादन का एक ऐसा अनोखा तरीका पेश किया है, जिसमें न तारों की जरूरत पड़ती है और न ही किसी पारंपरिक जनरेटर की। इस तकनीक को Contactless Electricity Generation नाम दिया गया है। इसमें सिर्फ कंप्रेस्ड हवा और Tesla Turbine जैसे खास डिजाइन की मदद से Static Electricity को काम की बिजली में बदला जाता है। दावा है कि यह सिस्टम 800 वोल्ट तक का आउटपुट और 2.5 एम्पियर करंट पैदा कर सकता है, वो भी बिना किसी केमिकल या अतिरिक्त पार्टिकल के।

Static Electricity अब समस्या नहीं, समाधान

अब तक फैक्ट्रियों और इंडस्ट्रियल यूनिट्स में Static Electricity को परेशानी माना जाता था। इससे धूल चिपकती है, नमी जमा होती है और कई बार सेफ्टी रिस्क भी बढ़ जाता है। लेकिन इस नई तकनीक में यही Static Electricity फायदेमंद बन जाती है। हाई वोल्टेज आउटपुट के कारण यह सिस्टम नेगेटिव आयन पैदा करता है, जो हवा में मौजूद धूल और नमी को न्यूट्रल कर इकट्ठा करने में मदद करता है। नतीजा, बिजली भी बनती है और हवा भी साफ होती है।

100 साल पुराना आइडिया, आज की जरूरत

इस इनोवेशन की जड़ें करीब एक सदी पुरानी हैं। यह तकनीक Nikola Tesla के 1913 में पेटेंट किए गए Bladeless Tesla Turbine से प्रेरित है। आम टर्बाइन में ब्लेड होते हैं, लेकिन Tesla Turbine में पास-पास लगी चिकनी डिस्क होती हैं। हवा इन डिस्क से चिपककर घूमती है और घर्षण से रोटेशन पैदा होता है। कम मूविंग पार्ट्स होने के कारण यह डिजाइन ज्यादा टिकाऊ और कम खराब होने वाला माना जाता है।

पुरानी इंजीनियरिंग और नई मटीरियल साइंस का संगम

नई डिवाइस में Tesla Turbine के इस कॉन्सेप्ट को Triboelectric Materials के साथ जोड़ा गया है। इसमें घूमने वाली डिस्क, अलग-अलग मटीरियल लेयर, बेयरिंग और ऐक्रेलिक हाउसिंग शामिल हैं। जैसे ही कंप्रेस्ड हवा अंदर जाती है, 300 मीटर प्रति सेकेंड तक की तेज फ्लो बनती है। सिर्फ सतह के घर्षण से रोटेटर घूमता है और 0.2 MPa प्रेशर पर 8472 RPM तक की स्पीड हासिल करता है।

इंडस्ट्री को मिलेगा दोहरा फायदा

कई इंडस्ट्रियल यूनिट्स पहले से कंप्रेस्ड हवा का इस्तेमाल करती हैं। यह टेक्नोलॉजी उन्हें दोहरा लाभ दे सकती है, अतिरिक्त बिजली उत्पादन और Static Electricity का न्यूट्रलाइजेशन। इससे आग लगने का खतरा घटेगा, मशीनों की उम्र बढ़ेगी और काम का माहौल सुरक्षित बनेगा। साथ ही, एनर्जी कॉस्ट कम होने की भी उम्मीद है।

Static Electricity बनती कैसे है

जब कंप्रेस्ड हवा पाइप से गुजरती है, तो धूल के कण और पानी की बूंदें दीवारों से रगड़ खाती हैं। इससे इलेक्ट्रॉन्स का लेन-देन होता है और Static Charge बनता है। इसी प्रक्रिया को Triboelectric Effect कहा जाता है। नई तकनीक इसी चार्ज को कैप्चर कर बिजली में बदल देती है।

क्या यही है इंडस्ट्रियल एनर्जी का भविष्य?

यह तकनीक दिखाती है कि कैसे पुरानी सोच और आधुनिक टेक्नोलॉजी मिलकर बड़ी समस्याओं का हल निकाल सकती हैं। जो Static Electricity कभी बेकार या खतरनाक मानी जाती थी, वही अब एनर्जी का नया स्रोत बन सकती है। बड़े पैमाने पर अपनाने पर यह इंडस्ट्री की बिजली, सेफ्टी और एफिशिएंसी की तस्वीर बदल सकती है।

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