अपार आईडी बनी 12वीं छात्रों की सबसे बड़ी परेशानी, 8 हजार छात्र संकट में; CET फॉर्म अटके

APAAR ID: नासिक के 8 हजार से अधिक 12वीं छात्रों की पढ़ाई संकट में है। अपार आईडी नहीं बनने से वे CET परीक्षा के फॉर्म नहीं भर पाएंगे, जिससे करियर पर खतरा मंडरा रहा है।
The Aadhaar ID has become the biggest problem for 12th-grade students; 8,000 students are in trouble; CET forms are stuck
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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One Student One ID: नासिक जिले के 12वीं कक्षा के छात्रों के सामने इन दिनों पढ़ाई से भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार की 'वन स्टूडेंट, वन आईडी' योजना के तहत अनिवार्य की गई 'अपार आईडी' अब छात्रों के करियर की राह में रोड़ा बनती दिख रही है।

जिले के 8 हजार से अधिक छात्र तकनीकी कारणों से अब तक यह आईडी नहीं बनवा सके हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बिना इस आईडी के छात्र व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए होने वाली सीईटी (सीईटी) परीक्षा के फॉर्म नहीं भर पाएंगे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत छात्र के पूरे शैक्षणिक जीवन को डिजिटल रूप देने के लिए यह कार्ड तैयार किया जा रहा है। यह 12 अंकों का एक यूनिक कोड है जो छात्र के क्रेडिट स्कोर, स्कॉलरशिप और डिग्री को एक ही जगह संकलित करेगा।

महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षा परिषद ने सख्त आदेश जारी किए हैं कि बिना अपार आईडी के किसी भी छात्र का प्री-एंट्रेंस फॉर्म स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार ने 31 जनवरी 2026 तक शत-प्रतिशत पंजीकरण पूरा करने की समय सीमा तय की है, जिससे स्कूलों और छात्रों में हड़कंप मचा है।

तकनीकी चक्रव्यूह में फंसे छात्र और शिक्षक

अपार आईडी बनाने की राह में 'आधार' - सबसे बड़ी दीवार बनकर खड़ा है। जिले के हजारों आवेदन इसलिए लंबित हैं क्योंकि छात्रों के आधार कार्ड और स्कूल रिकॉर्ड में नाम या जन्मतिथि मेल नहीं खा रही है।

इसके अलावा, मोबाइल नंबर लिंक न होना और कुछ अभिभावकों द्वारा डेटा प्राइवेसी के डर से सहमति न देना भी बड़ी अड़चन है। अकेले नाशिक में ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में साढ़े पांच लाख से ज्यादा छात्र इसी तकनीकी जाल में उलझे हुए हैं।

शिक्षकों का आरोप है कि एक तरफ सरकार जल्द काम पूरा करने का दबाव बना रही है, तो दूसरी तरफ अधिकांश गैर-शिक्षण कर्मचारियों और शिक्षकों को महानगरपालिका चुनाव की ड्यूटी में लगा दिया गया है।

नाशिक में 89.16 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, लेकिन बचे हुए 8 हजार छात्रों के पास केवल दो हफ्ते का समय है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो ये छात्र मार्च से मई के बीच होने वाली महत्वपूर्ण परीक्षाओं से वंचित हो सकते हैं।

बोर्ड परीक्षाओं का दबाव और 'अपार' की टेंशन

अगले महीने यानी फरवरी में 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। छात्र पहले से ही सिलेबस पूरा करने के दबाव में हैं, ऊपर से अब अपार आईडी के लिए स्कूलों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

अभिभावकों का कहना है कि प्रशासन को या तो समय सीमा बढ़ानी चाहिए या फिर आधार सुधार के लिए विशेष कैंप लगाने चाहिए।

शिक्षा विभाग का 'एक्शन प्लान'

संकट को देखते हुए शिक्षा विभाग ने अब स्कूलों को 'विशेष अभियान' चलाने के निर्देश दिए है। शिक्षकों से कहा गया है कि वे छुट्टी के दिनों में भी इस काम को प्राथमिकता दें ताकि नाशिक का कोई भी होनहार छात्र अपनी प्रवेश परीक्षा से वंचित न रहे।

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