'गौरी-गणपति' के लिए बाजार में रौनक, गौरी को अर्पित की जाने वाली 16 सब्जियों का अपना विशेष महत्व

Gauri-Ganpati in Nashik: नाशिक के बाजारों में खूब चहल-पहल है। इस साल गौरी का प्रसाद बनाने के लिए जरूरी सब्जियां आम लोगों की पहुंच में हैं।
'गौरी-गणपति' के लिए बाजार में रौनक
'गौरी-गणपति' के लिए बाजार में रौनक (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Nashik News: गौरी-गणपति के आगमन को लेकर नासिक के बाजारों में खूब चहल-पहल है। इस साल गौरी का प्रसाद बनाने के लिए जरूरी सब्जियां आम लोगों की पहुंच में हैं। 16 स्वास्थ्यवर्धक सब्जियों का संग्रह 100 से 110 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध है। इसके अलावा, रोजमर्रा की सब्जियां भी 80 रुपये प्रति किलो पर मिल रही हैं, जिससे गृहिणियों को काफी राहत मिली है। पिछले चार-पांच दिनों से सब्जियों की आवक अच्छी रही है, जिससे कीमतें स्थिर हैं।

पड़वल 100 रुपये, अलसी 80 रुपये और लहसुन के पत्तों का एक बंडल 20 रुपये में मिल रहा है। एक बड़ा बदलाव यह देखने को मिला है कि अब लोग सोलह अलग-अलग सब्जियां खरीदने के बजाय, बाजार से तैयार संग्रह खरीद रहे हैं। यह संग्रह 50 से 60 रुपये में भी उपलब्ध है, जिससे पूजा की तैयारी करना आसान हो गया है। गणेशोत्सव के दौरान, प्याज और लहसुन की मांग कम हो गई है। इसका कारण यह है कि कई घरों में गणपति और गौरी को भोग लगाते समय इन सब्जियों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

16 सब्जियों का अपना विशेष महत्व

इस वजह से लहसुन की कीमत 120 रुपये और प्याज की कीमत 20 रुपये प्रति किलो तक कम हो गई है। गौरी को अर्पित की जाने वाली 16 सब्जियों का अपना विशेष महत्व है। इनमें गाजर, शेपू, गवार, मेथी, पालक, टमाटर और आलू जैसी सब्जियां शामिल हैं। इन सब्जियों में से हर एक का स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत महत्व है, जैसे गाजर रक्त - शर्करा को नियंत्रित करती है और पालक आयरन से भरपूर होता है।

परंपरा और विधि से होगा पूजन

गौरी - के आने के बाद, उनका विधि-विधान से - पूजन किया जाएगा। इसके लिए घरों को सुंदर रंगोलियों और आकर्षक सजावट से मनमोहक बनाया जा रहा है। कई घरों में गौरी - की खड़ी प्रतिमाएँ पूजी जाती हैं, जबकि कुछ जगहों पर मुखौटे और मूर्तियों को पूजा स्थल पर रखकर सजाया जाएगा। धर्मशास्त्र विशेषज्ञ डॉ। नरेंद्र धारणे ने बताया कि गौरी पूजन की परंपरा हर परिवार की कुल परंपरा पर निर्भर करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद माह के अनुराधा नक्षत्र में गौरी का आवाहन किया जाता है, ज्येष्ठा नक्षत्र के दिन उनका पूजन होता है, और - मूल नक्षत्र में उनका विसर्जन किया जाता है।

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गौरी आह्वान का शुभ मुहूर्त

धर्मशास्त्र के अनुसार, गौरी का आह्वान भाद्रपद माह के अनुराधा नक्षत्र में किया जाता है। इसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र के दिन उनका विधि-विधान से पूजन होता है, और मूल नक्षत्र में उनका विसर्जन किया जाता है। गौरी आगमन की पूर्व संध्या पर नासिक के बाजार पूरी तरह से गुलजार हो गए थे। महिलाएं गौरी के लिए कपड़े, आभूषण, सजावट का सामान, - और प्रसाद बनाने की सामग्री खरीदने में व्यस्त थीं।

नैवेद्य पर विशेष सुझाव तुरंत ग्रहण करें प्रसाद

डॉ. धारणे ने गौरी के नैवेद्य को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि कई घरों में यह प्रथा है कि नैवेद्य को पूरी रात भगवान के सामने रखा जाता है और अगले दिन प्रसाद के रूप में खाया जाता है। यह तरीका सही नहीं है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, किसी भी देवी-देवता को नैवेद्य अर्पित करने के तुरंत बाद ही उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण कर लेना चाहिए। अगले दिन नैवेद्य को प्रसाद के रूप में लेना उचित नहीं है। यह बात भक्तों को इस पर्व के दौरान सही विधि का पालन करने का संदेश देती है।