नागपुर के प्राइवेट अस्पतालों ने सरकारी योजनाओं से मोड़ा मुंह, मरीजों की बढ़ी मुश्किलें, जानें क्या है कारण

Nagpur Private Hospitals News: नागपुर में 2500 से ज्यादा अस्पताल होने के बावजूद केवल 86 ही आयुष्मान और महात्मा फुले जनस्वास्थ्य योजना से जुड़े हैं। निजी अस्पताल सरकारी योजनाओं से दूरी बना रहे हैं।
Government Health Schemes Maharashtra Nagpur Private Hospitals News
नागपुर मेडिकल हॉस्पिटल (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Government Health Schemes Maharashtra: अच्छी स्वास्थ्य सेवा नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। इसी अधिकार के मद्देनजर महाराष्ट्र सरकार द्वारा महात्मा फुले जनस्वास्थ्य योजना और आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना चलाई जा रही हैं, लेकिन पिछले वर्षों में इन योजनाओं को लेकर प्राइवेट अस्पतालों की रुचि कम ही रही है। इसका प्रमाण है, जहां नागपुर जिले में 2500 से अधिक अस्पताल हैं, वहीं इन योजनाओं में केवल 86 अस्पताल ही शामिल हैं।

महात्मा फुले जनस्वास्थ्य योजना और आयुष्मान भारत योजना के तहत अब तक 1,362 बीमारियों के इलाज को मान्यता थी, जिसे बढ़ाकर अब 2,399 कर दिया गया है। वहीं उपचार निधि 5 लाख तक कर दी गई है। सभी बीमारियों के लिए अलग-अलग पैकेज निर्धारित किया गया है। उपचार निधि (प्रतिपूर्ति) करीब 2 महीने में मिल जाती है। इसके बाद भी अस्पतालों की रुचि नहीं है, जबकि योजना लागू होने से मरीजों की संख्या बढ़ती है। डॉक्टरों का मानना है कि भले ही बीमारियां अधिक हैं, लेकिन मंजूर की गई निधि पर्याप्त नहीं है।

वर्तमान में प्राइवेट अस्पतालों पर तरह-तरह के टैक्स लगाए जाने से उपचार शुल्क बढ़ा है। इस हालत में सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली निधि अस्पतालों को कम लगती है। यही वजह है कि ज्यादा अस्पताल शामिल नहीं हो रहे हैं।

नागपुर में 86 अस्पतालों में सरकारी योजनाओं का लाभ

नागपुर जिले में करीब 2000-2500 अस्पताल हैं। इनमें से केवल 86 अस्पतालों ने ही सरकारी योजना ली है। यही स्थिति नागपुर विभाग में भी बनी हुई है। योजना का लाभ देने के लिए सरकार ने कुछ मापदंड भी तय किये हैं। इनमें 10 से लेकर अधिकतम 30 बेड की क्षमता वाले अस्पतालों को शामिल किया जाता है। नागपुर में एक वर्ष के भीतर 99,853 मरीजों ने योजनाओं का लाभ लिया है।

जिलेवार लाभार्थी मरीज

क्रमांक जिला लाभार्थी मरीज
1 भंडारा 24,622
2 गोंदिया 8,864
3 वर्धा 29,487
4 गड़चिरोली 1,846
5 नागपुर 99,853
6 चंद्रपुर 6,303
कुल मरीज 1,70,975

याेजना में शामिल अस्पतालों की संख्या

क्रमांक जिला शामिल अस्पताल
1 भंडारा 27
2 गोंदिया 27
3 वर्धा 21
4 गड़चिरोली 23
5 नागपुर 86
6 चंद्रपुर 32
कुल अस्पताल 216

आज से पीएचसी, यूपीएससी में भी योजनाओं का लाभ

सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा योजनाओं के स्ट्रक्चर में बदलाव किया जा रहा है। यह बदलाव 24 फरवरी से लागू हुआ। इसके अंतर्गत बीमारियों की संख्या बढ़ाकर 2,399 कर दी गई है। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी शामिल किया जा रहा है। इससे अधिकाधिक मरीजों को लाभ मिलेगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 25 तरह की बीमारियों का पैकेज निर्धारित किया गया है।

इस बदलाव के साथ ही विभाग ने साफ्टवेयर में भी बदलाव किया है। अब राज्य स्तर पर नहीं बल्कि केंद्र स्तर पर ‘टीएमसी-2.0’ आयुष्मान योजना पोर्टल लागू होगा। राज्य की समूची कार्यप्रणाली इसी पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। सभी प्रक्रिया ऑनलाइन की जाएगी। मरीजों से लेकर पंजीयन, डिजिटल ट्रैकिंग भी होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर फर्जी मरीजों की पहचान की जाएगी। नये अस्पतालों को योजना में शामिल करने के लिए प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। इतना ही नहीं, अब अस्पतालों को निधि के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। करीब महीनेभर के भीतर अस्पतालों को निधि मिल सकेगी।

प्राइवेट अस्पतालों का खर्च बढ़ा

विदर्भ प्राइवेट अस्पताल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अशोक अरबट ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों की रुचि कम होने की मुख्य वजह निधि की कमी है। वर्तमान में प्राइवेट अस्पतालों का खर्च बढ़ गया है। इसी खर्च की वजह से इलाज खर्च भी बढ़ा है। अच्छे इलाज के लिए रकम भी अधिक खर्च करनी पड़ती है, जबकि सरकार से मिलने वाली निधि में यह संभव नहीं हो पाता। योजना में प्राइवेट अस्पतालों को शामिल करने की बजाय सरकारी व्यवस्था को ही मजबूत बनाना चाहिए, ताकि अधिकाधिक मरीजों को लाभ मिल सके।

- नवभारत लाइव के लिए नागपुर से दिनेश टेकाड़े की रिपोर्ट

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