

Ganga Godavari Pujan: इगतपुरी तहसील के कावनई में रविवार को गंगा-गोदावरी पूजन समारोह वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के तहत श्रीक्षेत्र कपिलधारा-कावनई तीर्थक्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार ने व्यापक योजना तैयार की है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में लगभग 116 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्य प्रगति पर हैं और इन्हें निर्धारित समय में पूरा करने के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
कार्यक्रम में विधायक हिरामण खोसकर, विधायक शांताराम मोरे, पूर्व मंत्री बबनराव घोलप, पूर्व विधायक शिवराम झोले, जिला परिषद की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतिभा संगमनेरे, सरपंच गोपाल पाटिल, विभिन्न संत-महंत, आश्रम ट्रस्ट के पदाधिकारी, ग्रामवासी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि कपिलधारा सिंहस्थ कुंभ मेले से जुड़ा एक प्राचीन और ऐतिहासिक तीर्थस्थल है।
इसके धार्मिक महत्व को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का विकास करना सरकार की प्राथमिकता है। पिछले सिंहस्थ के बाद इस क्षेत्र में सड़कें, सीमेंट कंक्रीट सड़कें, तालाब विकास, आंतरिक एवं बाहरी रिंग रोड सहित कई विकास कार्य पूरे किए गए हैं, जबकि शेष कार्य भी चरणबद्ध तरीके से पूरे किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए सड़क, यातायात, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता, आवास तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। विकास कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सभी परियोजनाएं निर्धारित समय में पूरी की जाएंगी।
मंत्री भुजबल ने गोदावरी सहित सभी जलस्रोतों को स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त रखने की अपील करते हुए कहा कि तीर्थस्थलों को प्लास्टिकमुक्त बनाना, स्वच्छता बनाए रखना तथा वृक्षारोपण को बढ़ावा देना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन से स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों, परिवहन क्षेत्र, पूजन सामग्री विक्रेताओं तथा किसानों को रोजगार के अवसर मिलते हैं। इसलिए श्रद्धालुओं का स्वागत कर उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है।
विधायक हिरामण खोसकर ने कपिलधारा क्षेत्र के लंबित विकास कार्यों को शीघ्र पूरा करने की मांग की। उन्होंने ग्राम पंचायत, तीर्थक्षेत्र विकास समिति और प्रशासन के समन्वय से तैयार विकास योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा सिंहस्थ से पूर्व सभी संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक आयोजित कर विकास कार्यों में तेजी लाने का आग्रह किया।
इस अवसर पर संत-महंतों ने कपिलधारा तीर्थक्षेत्र की धार्मिक परंपरा के संरक्षण के साथ श्रद्धालुओं के लिए अधिक से अधिक सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं वैष्णव अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने 17 अगस्त 2027 को होने वाले पारंपरिक स्नान को सिंहस्थ की आधिकारिक योजना में शामिल करने की मांग राज्य सरकार से की।