

E20 Janta Party Explained: भारत में E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। वाहन मालिकों, कुछ एक्टिविस्टों और विपक्ष के एक वर्ग का कहना है कि सरकार द्वारा E20 पेट्रोल को बढ़ावा देने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को 100% पेट्रोल (बिना एथेनॉल मिश्रण) खरीदने का विकल्प भी मिलना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से प्रेरित एक समूह "E20 जनता पार्टी" नाम से अभियान चला रहा है।
इस अभियान के साथ कुछ विपक्षी नेताओं ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। हालांकि, पहले ही गडकरी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर चुके हैं और एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का बचाव किया है।
विरोध करने वालों का कहना है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों की माइलेज में कथित तौर पर 8% से 15% तक कमी देखी गई है। उनका आरोप है कि पुराने वाहनों में इससे इंजन, फ्यूल पंप और फ्यूल टैंक पर अतिरिक्त घिसाव या जंग जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं, जिससे वाहन मालिकों का मेंटेनेंस खर्च बढ़ता है।
इसके अलावा, कुछ विरोधी समूहों ने हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मुद्दा भी उठाया है। उनका दावा है कि नितिन गडकरी के परिवार से जुड़े कुछ कारोबारी हितों को एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति से लाभ हो सकता है। इन आरोपों के आधार पर उन्होंने अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई न्यायिक या आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
अभियान चला रहे समूहों की प्रमुख मांग है कि पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल के साथ-साथ 100% पेट्रोल भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि वाहन मालिक अपनी जरूरत और वाहन की अनुकूलता के अनुसार ईंधन चुन सकें। उनका कहना है कि कई जगह सामान्य पेट्रोल आसानी से उपलब्ध नहीं है या उसकी उपलब्धता सीमित हो गई है।
NEET पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पृष्ठभूमि में विपक्ष ने अब E20 नीति को लेकर भी सरकार पर दबाव बढ़ाया है। कुछ विपक्षी दल और अभियान चला रहे संगठन नितिन गडकरी तथा पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से इस नीति पर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
नितिन गडकरी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि यह एक "पेड कैंपेन" है और इसके पीछे ऐसे हित समूह हैं जो भारत की स्वच्छ ऊर्जा और एथेनॉल मिश्रण नीति का विरोध कर रहे हैं। सरकार का तर्क है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों को लाभ मिलेगा और प्रदूषण में कमी लाने में मदद मिलेगी।