छगन भुजबल का बगावती सुर, बोले– ओबीसी समाज के साथ हो रहा अन्याय

जब से महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन को मंजूरी मिली है, तब से ही कैबिनेट छगन भुजबल के सुरों में बदलाव देखने के लिए मिल रहा है। अब उन्होंने कहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट में जीआर को चैलेंज करेंगे।
Chhagan Bhujbal
कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Nashik News In Hindi: महायुति सरकार में कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल ने अपनी ही सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अब राज्य सरकार के उस जीआर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है जिसमें हैदराबाद गजट को मान्यता दी गई है।

गुरुवार को नाशिक में भुजबल ने कहा कि मराठा आरक्षण के लिए सरकार द्वारा जारी किया जीआर ओबीसी समाज के साथ अन्याय है, इसलिए सरकार इस जीआर को तुरंत वापस लें। भुजबल ने सरकार के फैसले पर अपनी आपत्ति जाहिर की। उन्होंने सुको की उन टिप्पणियों को पढ़कर सुनाया कि मराठा समुदाय की आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता। इसके मुताबिक मराठा को कुणबी नहीं माना गया है, साथ ही किसी भी समाज के कोटे में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।

ओबीसी का नुकसान नहीं होने देंगे : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री फडणवीस ने एक बार फिर दोहराया है कि वे किसी भी कीमत पर ओबीसी समाज का नुकसान नहीं होने देंगे मैं एक बार फिर बताना चाहता हूँ कि यह आरक्षण मराठा समाज के सभी लोगों के लिए नहीं है जिनके पास कुणबी होने का आधिकारिक प्रमाण है, उन्हें ही जाति प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा, ओबीसी नेताओं ने पहले भी कई बार जीआर का अध्ययन किया है।

CM को लिखा पत्र

हमने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक पत्र दिया है जिसमें अपनी सभी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। यह जीआर मीडिया और एक समुदाय की मांगों के दबाव में जारी किया गया, बिना आपत्ति दर्ज किए या कैबिनेट में सुझाव मांग यह फैसला लिया गया। सरकार पहले ही सामजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े मराठा को 10% आरक्षण दे चुकी है, इसलिए मराठा को फिर से ओबीसी सूची में शामिल करना अवैध है।

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