यशवंत शुगर फैक्ट्री की 299 करोड़ रुपए की जमीन डील सस्पेंड, फडणवीस ने जांच के आदेश दिए
Yashwant Sugar Factory: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राजस्व विभाग की अनुमति न होने पर यशवंत शुगर फैक्ट्री की 299 करोड़ रुपये की जमीन डील सस्पेंड कर जांच के आदेश दिए हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
यशवंत शुगर फैक्ट्री की 299 करोड़ रुपये की जमीन डील पर रोक (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Pune APMC Land Controvers: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने थेउर स्थित यशवंत कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री की जमीन की खरीद–बिक्री प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। राज्य सरकार ने पुणे एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) को फैक्ट्री की जमीन 299 करोड़ रुपये में खरीदने की अनुमति दी थी, लेकिन यह सामने आने के बाद कि इस लेन-देन के लिए राजस्व विभाग (Revenue Department) से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी, मुख्यमंत्री ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए इस डील को सस्पेंड करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, राजस्व विभाग को पूरे लेन-देन की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। रिपोर्ट आने तक जमीन की खरीद और बिक्री की सभी प्रक्रियाएं स्थगित रहेंगी।
राजस्व विभाग की अनुमति क्यों जरूरी?
थेउर स्थित यशवंत शुगर फैक्ट्री की जमीन से जुड़े इस सौदे में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जानकारी के अनुसार, संबंधित जमीन वास्तव में फैक्ट्री के स्वामित्व में नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के अधिकार क्षेत्र में है। साथ ही यह जमीन चिंचवाड़ देवस्थान की बताई जा रही है और क्लास-3 श्रेणी में आती है। ऐसे में यह जांच आवश्यक है कि क्या जमीन को क्लास-1 में परिवर्तित किया गया है और क्या इसके लिए सभी वैधानिक अनुमतियां प्राप्त की गई थीं। इन्हीं कारणों से राजस्व विभाग की अनुमति अनिवार्य मानी जाती है।
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प्रशांत कालभोर के बयान से खुला मामला
पुणे एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी के निदेशक प्रशांत कालभोर ने मुख्यमंत्री के संज्ञान में यह मामला लाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राजस्व विभाग की अनुमति लिए बिना ही जमीन का लेन-देन किया जा रहा था और जब तक आवश्यक अनुमति नहीं मिलती, तब तक इस सौदे को तुरंत रोका जाना चाहिए।
राज्य सरकार ने 16 सितंबर को एक सरकारी निर्णय के जरिए 99 एकड़ 97 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की इस जमीन को 299 करोड़ रुपये में पुणे मार्केट कमेटी को बेचने की मंजूरी दी थी। हालांकि, बाद में सामने आया कि राजस्व विभाग से पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल कार्रवाई की।
नोटरी एग्रीमेंट और 36.50 करोड़ रुपये का भुगतान
इस सौदे से जुड़ा एक और गंभीर आरोप यह है कि जमीन का लेन-देन केवल 500 रुपये के नोटरी एग्रीमेंट के आधार पर किया गया। आरोप है कि पुणे एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी ने बिना किसी रजिस्टर्ड बिक्री समझौते या विधिवत मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के, यशवंत शुगर फैक्ट्री को 36 करोड़ 50 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। अब जबकि जमीन सौदे पर रोक लग गई है, सवाल उठ रहा है कि इस रकम का भविष्य क्या होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नोटरी दस्तावेज के आधार पर किए गए इस भुगतान के चलते कानूनी जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
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निरीक्षण के आदेश, रिपोर्ट तलब
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद सहकारिता और विपणन विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। कोऑपरेटिव और मार्केटिंग सेल की अधिकारी सरिता देहानकर ने शुगर कमिश्नर और मार्केटिंग डायरेक्टर को पत्र भेजकर पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट और राय तुरंत प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही 12 दिसंबर को जारी राजस्व एवं वन विभाग का पत्र और प्रशांत कालभोर का बयान भी संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है। अब यशवंत कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री की जमीन डील का भविष्य पूरी तरह से राजस्व विभाग की जांच रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों पर निर्भर करेगा।
