लापता लड़कियों के बढ़ते मामले: मुख्यमंत्री ने दिया राज के सवाल का जवाब, बताई आंकड़ों की सच्चाई

CM Fadnavis On Raj Thackeray: मुंबई में लापता लड़कियों के बढ़ते मामलों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आंकड़ों की सच्चाई बताई, जबकि मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की।
लापता लड़कियों के बढ़ते मामले
लापता लड़कियों के बढ़ते मामले (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Nagpur Winter Session: मुंबई से लड़कियों के लापता होने के मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बीते 10 महीनों में 1,187 लड़कियों के लापता होने के मामले दर्ज किए गए हैं। इसका अर्थ है कि शहर से हर दिन औसतन 4 से 5 लड़कियां गायब हो रही हैं। इस गंभीर मुद्दे पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर चिंता जताई है। पत्र में उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि विधानसभा सत्र में ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा क्यों नहीं हो रही है।

राज ठाकरे के पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उन्होंने अभी तक वह पत्र पूरी तरह नहीं पढ़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई मामलों में यदि कोई लड़की घरेलू विवाद के बाद घर छोड़कर कुछ दिनों बाद वापस लौट आती है, तब भी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज की जाती है, जिससे आंकड़े अधिक प्रतीत होते हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सफाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुभव के अनुसार, एक वर्ष के भीतर लगभग 90 प्रतिशत लड़कियां सुरक्षित रूप से मिल जाती हैं या स्वयं घर लौट आती हैं। शेष मामलों में भी अगले कुछ समय में लड़कियों का पता चल जाता है। इसलिए, आंकड़े भले ही बड़े दिखें, लेकिन वास्तविक स्थिति उतनी भयावह नहीं है, जैसा प्रतीत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि राज ठाकरे द्वारा उठाए गए किसी मुद्दे पर संदेह या ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो सरकार उसका जवाब अवश्य देगी।

राज ठाकरे के पत्र में उठाए गए सवाल

राज ठाकरे ने अपने पत्र में लिखा कि महाराष्ट्र में बच्चों के अपहरण और गुमशुदगी के मामलों में चिंताजनक वृद्धि हो रही है। एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से 2024 के बीच इन मामलों में लगभग 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय हैं, जो बच्चों का अपहरण कर उनसे जबरन मजदूरी, भीख मंगवाने जैसे अमानवीय कार्य करवा रहे हैं। राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि सरकार इन संगठित अपराधों के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि एनसीआरबी के आंकड़े केवल दर्ज शिकायतों को दर्शाते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि कितने मामले वास्तव में पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाते। साथ ही, जिन बच्चों को बाद में बचा भी लिया जाता है, उनके मानसिक आघात (ट्रॉमा) का क्या होगा? उन्होंने सरकार से इन मामलों में सख्त और प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

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