दहेज उत्पीड़न मामले में हिंसा का होना जरूरी! सुप्रीम कोर्ट ने क्रूरता के अभाव में रद्द किया मामला

Supreme Court Verdict: दहेज उत्पीड़न के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देते हुए मामले को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने क्रूरता के अभाव में मामले को रद्द किया।
Supreme Court Verdict: दहेज उत्पीड़न के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देते हुए मामले को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने क्रूरता के अभाव में मामले को रद्द किया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला (डिजाइन फोटो)
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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में, बहू द्वारा लगाए गए ‘सामान्य और अस्पष्ट’ आरोपों के आधार पर चल रहे दहेज प्रताड़ना के एक आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप, अगर पूरी तरह सच भी मान लिए जाएं, तो भी वे दहेज के लिए उत्पीड़न के अपराध की कानूनी परिभाषा को पूरा नहीं करते।

यह आदेश जस्टिस भूषण गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस अतुल चांदूरकर की पीठ ने सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि बहू के जीवन या स्वास्थ्य को खतरे में डालने जैसा कोई विशिष्ट कृत्य नहीं किया गया था। इस फैसले से नागपुर निवासी ससुर संजय जैन, सास सरोज और ननद पूर्णिमा को बड़ी राहत मिली है, जिनके खिलाफ यह मुकदमा चल रहा था।

क्या था पूरा मामला?

पूजा जैन ने आरोप लगाया था कि जुलाई 2021 में हुई उनकी शादी के कुछ ही समय बाद ससुराल वालों ने उन पर मायके से पैसे लाने के लिए दबाव डालना शुरू कर दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि जब उन्होंने यह बात अपने पति को बताई तो उन्हें अपमानित किया गया। उन्होंने ससुराल वालों पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कहा था कि इसी से तंग आकर वह 12 अक्टूबर 2021 को मायके चली गई।

बॉम्बे हाई कोर्ट का खटखटाया था दरवाजा

इन आरोपों के आधार पर, बजाजनगर पुलिस ने 6 फरवरी 2022 को दहेज उत्पीड़न और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। आरोपी परिवार ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, 19 मार्च 2024 को हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके पश्चात सुको तक मामला पहुंचा। बचाव पक्ष से एड. कार्तिक शुकुल ने पैरवी की।

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