नागपुर स्कूल यूनिफॉर्म फंड में नहीं हुई कोई कटौती! 240 की किस्त पर मचे बवाल के बाद शिक्षा विभाग ने दी सफाई
Nagpur School Uniform Scheme: नागपुर में मुफ्त स्कूल यूनिफॉर्म योजना को लेकर फैली भ्रम की स्थिति पर समग्र शिक्षा विभाग ने सफाई दी।विद्यार्थियों को दो यूनिफॉर्म के लिए 600 रुपये में कोई कटौती नहीं हुई।
- Written By: अंकिता पटेल
मुफ्त गणवेश योजना,प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सौजन्य AI)
Nagpur School Uniform Scheme Fund: नागपुर शालेय विद्यार्थियों को हर वर्ष सरकार द्वारा 2 यूनिफार्म मुफ्त में दिया जाता है। इसके लिए प्रति विद्यार्थी 600 रुपये देने की योजना है लेकिन इस वर्ष केवल 240 रुपये प्रति विद्यार्थी अंतरिम राशि ही मिली।
इससे यह यह संभ्रम फैल गया कि निधि में कटौती की गई है। यह रकम स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) के खातों में जमा हुई है। कम राशि मिलने से अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय स्तर पर प्रशासन के खिलाफ रोष बढ़ने के बाद अब समग्र शिक्षा विभाग ने सफाई दी है।
240 रुपये सिर्फ पहली किस्त, दो गणवेश के लिए 600 रुपये की योजना बरकरार
विभाग का कहना है कि निधि को लेकर गलतफहमी हुई है और विद्यार्थियों को 2 गणवेशों के लिए कुल 600 रुपये देने की योजना जारी है। सूत्रों ने जानकारी दी कि 240 रुपये की यह राशि राज्य सरकार के 40 प्रतिशत हिस्से की पहली किस्त है।
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केंद्र सरकार का 60 प्रतिशत हिस्सा यानी 360 रुपये, ‘स्पर्श-एसएनए’ प्रणाली पर गणवेश वितरण का डेटा अपलोड किए जाने के बाद ही जारी किया जाएगा। मतलब जब तक स्कूल पहले गणवेश के वितरण की जानकारी पोर्टल पर दर्ज नहीं करेंगे तब तक केंद्र सरकार की ओर से एक भी रुपया जारी नहीं किया जाएगा।
समितियों को गणवेश तय करने का अधिकार
बताते चलें कि स्कूल प्रबंधन समितियों को पहला गणवेश तय करने का अधिकार दिया गया है, जबकि दूसरा गणवेश स्काउट-गाइड का नीले रंग का अनिवार्य रखा गया है। गणवेश सिलाई का काम स्थानीय महिला बचत गटों को देने के निर्देश दिए गए है, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा मिल सके।
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साथ ही स्कूल खुलने के पहले ही दिन विद्यार्थियों को गणवेश उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है लेकिन पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी होने के आरोप लग रहे हैं। निधि वितरण की चरणबद्ध व्यवस्था और उससे जुड़ी पर्याप्त जानकारी न देने के कारण प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा किया जा रहा है। यह तो तय माना जा रहा है कि पहले दिन बच्चों को गणवेश वितरण मुश्किल हो सकता है।
