जारी रहेगी कोर जोन में सफारी, मुख्य वन संरक्षकों की बैठक में निर्णय

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नागपुर. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने देश में सभी बाघ परियोजनाओं के कोर जोन में पर्यटन को पूरी तरह से बंद करने के अपने फैसले को वापस ले लिया. बाघ संरक्षण योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं के कोर एरिया में पर्यटकों को जाने की अनुमति दी जाएगी. देश के सभी मुख्य वन संरक्षकों (वन्य जीव) की बैठक 9 मार्च को हुई थी.

बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई. इसमें देश के आधे से ज्यादा राज्यों ने देश के वन सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के सामने एनटीसीए के फैसले पर नाराजगी जताई. उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि हमारे राज्यों के सुझावों पर विचार किए बिना कोई निर्णय नहीं लिया जाए.

गौरतलब है कि बाघ संरक्षण प्रारूप में कहा गया कि कोर क्षेत्र में पर्यटन को धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा. हालांकि रिसॉर्ट संचालकों, गाइड और स्थानीय लोगों के रोजगार को देखते हुए बाघ परियोजना प्रबंधन, वन विभाग के अधिकारियों ने पर्यटन प्रतिबंध आदेश को लागू नहीं किया.

5 जनवरी 2019 को बैठक हुई थी जिसमें लिये गये निर्णय के अनुसार 15 फरवरी 2022 को एक आदेश जारी किया गया कि बाघ परियोजना के कोर क्षेत्र में 'पूर्ण रूप से नो एंट्री जोन' बनाया जाये. यह भी कहा गया कि बफर जोन और बाकी क्षेत्र में ही पर्यटन की अनुमति दी जानी चाहिए. हालांकि देश के कई राज्यों ने इस आदेश पर नाराजगी जताई थी. इसलिए एनएनटीसीए ने 9 मार्च को नया आदेश जारी किया.

20% क्षेत्र में पर्यटन

बाघ संरक्षण प्रारूप में उल्लेख किया गया है कि 20% जगह पर्यटन के लिए है. संशोधित आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पूर्व निर्धारित 20 फीसदी जगह में ही सफारी की जाएगी, इससे अतिरिक्त जगह नहीं बढ़ाई जाएगी.

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