नागपुर IAS ट्रेनिंग सेंटर का बुरा हाल: फंड लौटा और जमीन भी नहीं मिली; क्या विदर्भ के छात्रों का सपना होगा चूर?

Nagpur IAS Coaching Center: विदर्भ के UPSC उम्मीदवारों के लिए बना नागपुर का IAS कोचिंग सेंटर बदहाली का शिकार है। 24 करोड़ का फंड वापस जाने और अटकी फाइलों ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है।
Nagpur IAS Coaching Center
नागपुर IAS ट्रेनिंग सेंटर (फोटो नवभारत)
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Govt IAS Training Center Maharashtra: विदर्भ के विद्यार्थी बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर रुख कर रहे हैं और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के माध्यम से आईएएस व आईपीएस जैसे उच्च पदों पर पहुंचने का सपना देख रहे हैं। इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए नागपुर के जीरो माइल स्थित पुराने मॉरिस कॉलेज परिसर में ‘आईएएस प्रशिक्षण केंद्र’ की स्थापना की गई थी लेकिन केंद्र के विस्तार और आधुनिकीकरण की योजनाएं वर्षों से लंबित हैं, जिससे इसकी स्थिति चिंताजनक होती जा रही है।

उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा नई लाइब्रेरी और बहुमंजिला इमारत के निर्माण के लिए अब तक भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई है। परिणामस्वरूप 100 छात्र क्षमता वाले प्रस्तावित वाचनालय का कार्य ठंडे बस्ते में चला गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि दिल्ली और मुंबई की तर्ज पर इस केंद्र का विकास आखिर कैसे होगा।

विदर्भ को अपेक्षाकृत पिछड़ा क्षेत्र मानते हुए यहां के विद्यार्थियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा में अधिक अवसर मिलें, इस उद्देश्य से इस केंद्र की स्थापना की गई थी। वर्ष 1986 से संचालित इस पूर्व प्रशिक्षण केंद्र से अब तक 200 से अधिक अभ्यर्थी सफल होकर केंद्र और राज्य शासन के विभिन्न उच्च पदों पर नियुक्त हो चुके हैं। वर्तमान में यहां 120 विद्यार्थियों को प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी कराई जाती है। आवास व्यवस्था के तहत दो विंग में 40 प्रशिक्षणार्थियों की सुविधा है। पुरानी इमारत में 80 छात्रों और तीसरे विंग में 16 छात्राओं के ठहरने की व्यवस्था है।

प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न

विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एक साथ 200 छात्र प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार स्तर तक पहुंचे अभ्यर्थियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत 100 छात्र क्षमता वाली नई लाइब्रेरी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 10 मंजिला भव्य इमारत प्रस्तावित थी। इस परियोजना के लिए लगभग 24 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया था।

नितिन राऊत ने भेजा था प्रस्ताव

तत्कालीन पालकमंत्री डॉ. नितिन राऊत के प्रयासों से पुराने मॉरिस परिसर में पीआईटीसी के समीप स्थित वसंतराव नाईक महाविद्यालय की खाली पड़ी भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव उच्च शिक्षा विभाग को भेजा गया था, लेकिन पिछले चार वर्षों से मंत्रालय स्तर पर इस प्रस्ताव पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नतीजतन 24 करोड़ रुपये का प्रावधानित निधि भी वापस लौट गयी, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

पिछले दिनों हुई जिला नियोजन समिति की बैठक में पूर्व पालकमंत्री व विधायक डॉ. नितीन राऊत ने केंद्र के सशक्तिकरण का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया, जिस पर प्रशासन स्पष्ट जवाब देने में असहज नजर आया।इसके बाद पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नागपुर के इस आईएएस प्रशिक्षण केंद्र को दिल्ली-मुंबई के समकक्ष विकसित करने का आश्वासन दिया और जिला वार्षिक योजना से आवश्यक निधि उपलब्ध कराने की बात कही।

लगातार हो रही प्रशासनिक देरी के कारण अब प्रतियोगी परीक्षा जगत में चर्चा है कि कहीं विकास की घोषणाएं केवल कागजों तक ही सीमित न रह जाएं। विकास के लिए सामूहिक प्रयासों के साथ ही इच्छाशक्ति की भी आवश्यकता है।

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