RTMNU में 'अपनों' पर मेहरबानी? समितियों में एक ही सदस्य की 70 बार नियुक्ति पर सीनेट में हंगामा!

Nagpur University Senate: नागपुर यूनिवर्सिटी की समितियों में नियुक्तियों पर बवाल। एक ही व्यक्ति 70 बार सदस्य! उपकुलपति ने 'ई-चाणक्य' सॉफ्टवेयर से रोटेशन का दिया भरोसा।
RTMNU Senate erupts over repetitive committee appointments. VC Manali Kshirsagar promises e-Chanakya software for transparent rotation system.
नागपुर यूनिवर्सिटी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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RTMNU Committee Appointments: नागपुर विश्वविद्यालय की विभिन्न समितियों में होने वाली नियुक्तियों को लेकर पारदर्शिता और समान अवसर का मुद्दा शुक्रवार को आयोजित सीनेट बैठक में प्रमुखता से उठा। कई सदस्यों ने यह आपत्ति दर्ज कराई कि समितियों में बार-बार वही सदस्य नियुक्त किए जा रहे हैं, जिससे अन्य योग्य सदस्यों को अवसर नहीं मिल पा रहा है। इस प्रक्रिया में सुधार करते हुए रोटेशन प्रणाली लागू करने की मांग भी बैठक में की गई।

सीनेट सदस्यों ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से इस विषय पर लगातार चर्चा हो रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। उनका कहना था कि समितियों के गठन में चक्रानुक्रम (रोटेशन) पद्धति अपनाई जानी चाहिए, ताकि प्रत्येक पात्र सदस्य को समान अवसर मिल सके। साथ ही एक व्यक्ति को सीमित संख्या में ही समितियों में शामिल करने का नियम बनाया जाए।

सीनेट बैठक में कुछ सदस्यों ने यह भी उल्लेख किया कि ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां कुछ व्यक्तियों को 60 से 70 बार तक विभिन्न समितियों में शामिल किया गया है। इससे अन्य सदस्यों में असंतोष की भावना पैदा हो रही है। सदस्यों ने पिछले एक वर्ष में विभिन्न समितियों में नियुक्त किए गए सदस्यों की पूरी सूची भी सभागार के सामने प्रस्तुत करने की मांग की।

बनाया जाएगा संतुलन

इस मुद्दे पर जवाब देते हुए उपकुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर ने बताया कि फिलहाल समितियों में नियुक्तियों की प्रक्रिया मैनुअल रूप से जांच की जा रही है। यह ध्यान रखा जाता है कि संबंधित सदस्य पहले किन समितियों में शामिल रहे हैं, ताकि एक ही व्यक्ति की बार-बार नियुक्ति से बचा जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि नियुक्तियों को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए ई-चाणक्य प्रणाली में नया कॉलम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से यह रिकॉर्ड रखा जा सकेगा कि किसी सदस्य का नाम कितनी बार समितियों के लिए प्रस्तावित या चयनित हुआ है। सॉफ्टवेयर प्रणाली लागू होने के बाद नियुक्तियों की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल हो जाएगी।

इस दौरान कुछ सदस्यों ने सॉफ्टवेयर प्रणाली लागू करने के लिए निश्चित समयसीमा तय करने की भी मांग की। उपकुलपति ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और समितियों में संतुलन व पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रशासन गंभीरता से काम कर रहा है।

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