48 नर्सों के पक्के होने का फैसला अटका: मनपा बैठक टलने से HC के आदेश वाले अहम प्रस्ताव पर नहीं हो सकी चर्चा

Nagpur House Meeting: नागपुर मनपा की सदन बैठक सत्ता पक्ष के नेता की अस्वस्थता के कारण अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई। इससे 48 संविदा नर्सों के नियमितीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर फैसला टल गया।
Decision on regularizing 48 nurses stalled: Discussion on key proposal mandated by High Court could not take place due to postponement of municipal corporation meeting.
48 नर्सें, नियमितीकरण (प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI)
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Nagpur Corporation Meeting Adjourned: नागपुर महानगरपालिका के सदन की कार्यवाही में सत्ता पक्ष के नेता की अस्वस्थता के कारण बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस स्थगन के चलते नेशनल अर्बन हेल्थ मिशन के तहत कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत 48 नर्सों को नियमित करने से जुड़े एक अति-महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर भी चर्चा टल गई है जिस पर हाई कोर्ट के आदेशानुसार निर्णय लिया जाना था।

सदन की कार्यवाही के दौरान उप नेता के हवाले से महापौर नीता ठाकरे ने बताया कि सत्ता पक्ष के नेता का स्वास्थ्य ठीक नहीं है और वे सभागृह में उपस्थित नहीं हैं। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि उनकी गैर मौजूदगी में सदन की कार्यवाही चलाना उचित नहीं होगा, इसलिए अगली तारीख तय करके सभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया जाए। विपक्ष के नेता ने भी उप नेता के इस स्थगन प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताई।

हाई कोर्ट के आदेश की सदन में रखें जानकारी

स्थगन के प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के नेता संजय महाकालकर ने कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत नसों को लेकर हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश तथा विषय पत्रिका में इसके उल्लेख को लेकर ध्यान आकर्षित किया।

उन्होंने कहा कि यह विषय बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें मनपा आयुक्त को हाई कोर्ट के आदेश के तहत अपना निवेदन प्रस्तुत करना है। यह मामला नेशनल अर्बन हेल्थ मिशन के अंतर्गत पिछले कई वर्षों से महानगरपालिका में अपनी सेवाएं दे रहीं 48 कॉन्ट्रैक्ट नसों के नियमितीकरण से जुड़ा है।

इन नर्सों ने अपनी नौकरी को नियमित करने की मांग को लेकर अदालत में याचिका दायर की है। महाकालकर ने जोर देकर कहा कि अदालत के संभावित बंधनों को ध्यान में रखते हुए भी इस विषय को तुरंत सदन की चर्चा में लिया जाना चाहिए।

...तो उप नेता की क्या जरूरत ?

सत्ता पक्ष नेता की तबीयत खराब होने के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित किए जाने पर कुछ पार्षदों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। यहां तक कि सत्ता पक्ष के भी कुछ पार्षदों की ओर से असहज टिप्पणी की गई। पार्षदों का मानना था कि उनके प्रभाग के विकास को लेकर प्रशासन से प्रश्न पूछने का उनके पास आम सभा के बतौर एक मौका होता है जिसके लिए एक माह का इंतजार करना पड़ता है।

यहां तक कि कई बार प्रश्न स्वीकार नहीं होने पर अलग परेशानी होती है। ऐसे में केवल सत्ता पक्ष नेता की अनुपस्थिति में सदन की कार्यवाही स्थगित करना अनुचित है। उनके स्थान पर नियुक्त उप नेता सदन में जिम्मेदारी संभाल सकती है। यहां तक कि नागपुर मनपा के नियमों में इस तरह से स्थगन का कोई विकल्प नहीं है।

समयसीमा में ही निर्णय

चर्चा और स्थगन के सुझावों पर महापौर ने अपना निर्णय सुनाया। उन्होंने उप नेता और विपक्ष के नेता की सहमति को स्वीकार करते हुए सदन को स्थगित करने का फैसला लिया।

नर्सों से जुड़े हाई कोर्ट के आदेश वाले महत्वपूर्ण मुद्दे पर महापौर ने सदन को आश्वस्त किया कि प्रशासन के पास स्पष्ट निर्देश हैं और अदालत द्वारा दी गई समयसीमा के भीतर ही इस मुद्दे को दोबारा सदन में लाया जाएगा।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द से जल्द अगली बैठक बुलाई जाएगी, ताकि समय रहते इस पर उचित निर्णय लिया जा सके। इन आश्वासनों के साथ मंगलवार की सभा को आधिकारिक तौर पर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

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