सरकारी जमीन पर लेआउट बनाकर बेंच दिए प्लॉट, भांडेवाड़ी में कारनामा, हाई कोर्ट का धोखेबाज पर एक्शन

Nagpur News: नागपुर के भांडेवाड़ी इलाके से अजीबोगरीब मामला सामने आया है। भांडेवाड़ी में सरकारी जमीन पर लेआउट बनाकर बेचने का मामले ने सभी के होश उड़ा दिए है, जिस पर हाई कोर्ट ने एक्शन लिया है।
Nagpur News: नागपुर के भांडेवाड़ी इलाके से अजीबोगरीब मामला सामने आया है। भांडेवाड़ी में सरकारी जमीन पर लेआउट बनाकर बेचने का मामले ने सभी के होश उड़ा दिए है, जिस पर हाई कोर्ट ने एक्शन लिया है।
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
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High Court: सरकारी जमीन अतिक्रमणों की चपेट में आना भले ही कोई नई बात न हो किंतु सरकारी जमीन पर लेआउट बनाकर प्लॉट बेचना किसी आश्चर्य से कम नहीं है, जबकि प्लॉट बेचने के लिए भी कई सरकारी विभागों में दस्तावेजों का पंजीयन कराना पड़ता है। इसके बावजूद उस समय एक ऐसे मामले का खुलासा हुआ जब कथित धोखेबाज करीमुल्लाह खान हाजी हफीजुल्लाह खान जमानत के लिए हाई कोर्ट की शरण में आया।

सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने मामले को गंभीर बताते हुए जमानत देने से इनकार कर अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। हाई कोर्ट के आदेश में कहा गया कि आरोपी ने सरकारी जमीन को अपनी बताकर कई लोगों को ठगा है और इस मामले में हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।वाठोडा पुलिस थाना में शिकायतकर्ता मोहम्मद शमी आलम ताहिर हुसैन ने शिकायत दर्ज कराई थी।

बेच दिए थे 44 प्लॉट

  • शिकायतकर्ता मोहम्मद शमी आलम ताहिर हुसैन ने बताया कि उन्होंने 2010 में भांडेवाड़ी में खसरा संख्या 116/1 और 117/2 में 900 वर्ग फुट का प्लॉट नंबर-16, 1,80,000 रुपये में खरीदा था।
  • उस समय 7/12 करीमुल्लाह खान हाफिजुल्लाह खान, जाफरुल्लाह खान हाफिजुल्लाह खान, समीर खान रहमतुल्लाह खान, शादाब खान हिदायतुल्लाह खान, नदीम खान @ बंटी विलायतुल्लाह खान, सूफियाज खान लिकायतुलह खान और अन्य के नाम पर था।
  • 2017 में शिकायतकर्ता ने प्लॉट नंबर 228 को 3,87,000 रुपये में खरीदा, जब जमीन मालिकों ने दावा किया कि उन्हें कुछ अतिरिक्त जमीन मिली है। 2020 तक लगभग 44 प्लॉट बेचे गए थे जिन पर खरीदारों ने अपने घर बनाए और वहां रह रहे थे।
  • शिकायतकर्ता ने 2020 में प्लॉट नंबर 13-ए और 14-ए को कुल 10,20,000 रुपये में बुक किया जिसमें जाफरुल्लाह खान को 1 लाख रुपये का अग्रिम और वकील अहमद को 4,93,000 रुपये का भुगतान किया गया।
  • बाद में उन्होंने और शाहजादा इदरीस ने प्लॉट नंबर 1, 5 और 140 को 1,09,29,000 रुपये में खरीदने पर सहमति व्यक्त की और साईं रत्न हाउसिंग लैंड डेवलपर्स को 21,000 रुपये का टोकन और फिर लगभग 52,71,000 रुपये का भुगतान किया।

5 वर्ष बाद एनआईटी की खुली नींद

6 जनवरी 2025 को एनआईटी के अधिकारियों ने इन प्लॉटों का दौरा किया और अतिक्रमण हटा दिया। यह बताया गया कि आरोपियों द्वारा बेचे गए प्लॉट अवैध थे क्योंकि NIT ने 1962 में ही इन जमीनों का अधिग्रहण सीवेज डिस्पोजल प्लांट और कचरा संग्रहण केंद्र के लिए किया था। आरोपी इनायतुल्लाह, रहमतुल्लाह, करीम तुल्लाह, हिदायतुल्लाह, सूफियाज खान लिकायतुल्लाह खान ने 60.04 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए मुआवजा भी प्राप्त किया था। इससे पता चलता है कि उन्हें जमीन के अधिग्रहण की जानकारी थी, फिर भी उन्होंने शिकायतकर्ता को धोखा देने के इरादे से प्लॉट नंबर 13-ए और 14-ए बेचने का समझौता किया।

बिक्री पत्र पर हस्ताक्षर नहीं

याचिकाकर्ता करीमुल्लाह खान के वकील ने तर्क दिया कि शिकायत में उनके मुवक्किल का नाम सीधे तौर पर नहीं है और किसी भी बिक्री विलेख पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि उनका मुवक्किल दस्तावेजों की जालसाजी या किसी भी धोखाधड़ी में शामिल नहीं है, इसलिए उनकी हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।

दोनों पक्षों की दलीलों और जांच कागजात का अध्ययन करने के बाद अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष और शिकायतकर्ता के वकील के तर्क में दम है। अदालत ने कहा कि 1962 में ही 60 एकड़ जमीन एनआईटी द्वारा अधिग्रहित की गई थी और केवल 6 एकड़ जमीन ही मालिकों को वापस की गई थी। इसके बावजूद आरोपी ने खुद को पूरी जमीन का मालिक बताया, उसे प्लॉटों में बांटा और बेचकर आर्थिक लाभ कमाया। जांच कागजात और विभिन्न घर मालिकों के बयानों से करीमुल्लाह खान की संलिप्तता का खुलासा हुआ है।

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