पाकिस्तान-अफगानिस्तान जंग: अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए जनता का ध्यान भटका रही पाकिस्तानी सेना

War Attention Diversion: पाक सेना घरेलू नाकामियों और जनता के गुस्से से ध्यान भटकाने के लिए अफगानिस्तान के साथ जंग को हवा दे रही है। गिलगिट-बाल्टिस्तान में सरकार के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
Pakistan-Afghanistan Conflict Military Using War to Divert Attention From Internal Failure 
शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Internal Failure Of Pakistan Military: पाकिस्तान की मौजूदा सरकार और सेना आज एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रहे हैं जहां जनता का भरोसा टूट रहा है। देश के अंदर बढ़ती महंगाई और सुरक्षा की विफलता ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। अपनी इस कमजोरी को छिपाने के लिए पाकिस्तानी सेना अब अफगानिस्तान के साथ सीमा पर जानबूझकर तनाव बढ़ा रही है। यह संघर्ष दरअसल एक 'डर्टी गेम' है जिसका मकसद जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाकर बाहरी दुश्मन की ओर ले जाना है।

गहराता सीमा विवाद और हमले

तालिबान ने पाकिस्तानी सेना पर काबुल, कंधार और पक्तिया जैसे कई अफगान प्रांतों में नए सैन्य हमले करने का गंभीर आरोप लगाया है। जवाब में अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट जिले में स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों पर हवाई हमले किए हैं। अफगानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार यह जंग अब दोनों देशों के बीच काफी खतरनाक और हिंसक रूप ले चुकी है।

घरेलू असंतोष और विरोध प्रदर्शन

पाकिस्तान के अंदर शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के खिलाफ जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। गिलगिट बाल्टिस्तान में सुरक्षा बलों द्वारा नागरिकों की हत्या के बाद लोग 'शहबाज-मुनीर मुर्दाबाद' के नारे लगाते हुए सड़कों पर हैं। सोशल मीडिया पर भी सेना के खिलाफ 'इस्तीफा दो' और 'बॉयकोट मिलिट्री बिजनेस' जैसे हैशटैग तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं।

खुफिया तंत्र की बड़ी नाकामी

फरवरी का महीना पाकिस्तान के लिए बेहद खूनी रहा है जिसमें मस्जिद में हुए सुसाइड हमले में 36 लोग मारे गए। बाजौर में हुए आतंकी हमले में 11 सैनिकों की जान चली गई, जिसे सुरक्षा और खुफिया तंत्र की बड़ी विफलता माना गया। खबरों के अनुसार सेना के पास इन हमलों की जानकारी पहले से थी, फिर भी कोई ठोस सुरक्षा कदम नहीं उठाया गया।

जनता को गुमराह करने की रणनीति

अपनी विफलता को छिपाने के लिए रावलपिंडी मुख्यालय ने अफगानिस्तान में हमले करके अपनी ताकत दिखाने का महज एक नाटक रचा है। जब जनता ने सेना की दखलंदाजी पर सवाल उठाए तो पाकिस्तान ने खुद को आतंकवाद का पीड़ित दिखाते हुए 'विक्टिम कार्ड' खेल दिया। यह पूरी रणनीति दरअसल पाकिस्तान की आम जनता के गुस्से को दबाने और मूल मुद्दों को हाशिए पर रखने की कोशिश है।

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