
निकाय चुनाव वोटर्स (सौजन्य-IANS, कंसेप्ट फोटो)
Reservation 50 Percent Limit: निकाय चुनाव में विविध वर्ग के लिए सीट आरक्षण 50 फीसदी से किसी भी सूरत में अधिक नहीं होना चाहिए। यह स्पष्ट आदेश सुप्रीम कोर्ट का है। 2 दिन पूर्व सीमा से ऊपर आरक्षण प्रतिशत जाने पर निकाय चुनाव रद्द करने की चेतावनी भी सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दी है। उससे बाद से यह चर्चा जोर पकड़ चुकी है कि क्या निकाय चुनाव रद्द हो जाएंगे जिसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है क्योंकि एससी, एसटी और ओबीसी प्रवर्ग का आरक्षण 50 फीसदी से ऊपर गया है।
कहा जा रहा है कि चुनाव आयोग ने ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण की व्याख्या करते हुए पुराने फ़ॉर्मूले के आधार पर सीटें तय कीं। ऐसा करते समय उन्होंने आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा की अनदेखी की। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जो अर्थ निकाला उससे गड़बड़ी पैदा हुई और अब चुनाव संकट में पड़ सकते हैं।
नागपुर जिला परिषद का ही उदाहरण लें तो यहां कुल 57 सीटों के लिए चुनाव होना है। इनमें से एससी के लिए 10, एसटी के लिए 8 और ओबीसी के लिए 15 सीटें आरक्षित की गई हैं। 24 सीटें ओपन वर्ग के लिए हैं। 57 सीटों का 50 फीसदी पकड़ें तो कुल 28 सीटें आरक्षित होनी चाहिए लेकिन यहां 33 सीटें आरक्षण में गई हैं।
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50 फीसदी से अधिक 5 सीटें अधिक आरक्षित हो गई हैं। आरक्षण की ऐसी ही स्थिति राज्यभर में नगर परिषद, नगर पंचायत, जिला परिषद और मनपा की भी है। अगर सुप्रीम कोर्ट ने आंखें टेढ़ी कीं तो चुनाव रद्द भी कर सकती है।
चुनाव को 50 फीसदी आरक्षण की सीमा में रहकर करना है तो ओबीसी की सीटों को ही कम करना होगा। एससी और एसटी की सीटों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। केवल ओबीसी की सीटें कम कर उन्हें सामान्य ओपन वर्ग में शामिल किया जाएगा। सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होने वाली सीटें लॉटरी सिस्टम से तय की जा सकती हैं।
ऐसा किया गया तो सभी सीटों पर आरक्षण प्रक्रिया फिर से लागू करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और समय भी बचेगा। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब सुप्रीम कोर्ट का 50 फीसदी सीमा वाला निर्देश स्पष्ट था तो आयोग ने वैसा क्यों नहीं किया, क्या चुनाव टालना ही उद्देश्य था।






